नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। नीति आयोग ने बुधवार को 'टीबी : आगे का रास्ता' विषय पर एक उच्चस्तरीय विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया। इसका मकसद 'टीबी-मुक्त भारत' के लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए रणनीति और सुझाव तैयार करना था।
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नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। नीति आयोग ने बुधवार को 'टीबी : आगे का रास्ता' विषय पर एक उच्चस्तरीय विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया। इसका मकसद 'टीबी-मुक्त भारत' के लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए रणनीति और सुझाव तैयार करना था।
नीति आयोग के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दी गई जानकारी के मुताबिक, इस सत्र की अध्यक्षता संयुक्त रूप से नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव व आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने की।
सत्र में नेशनल हेल्थ मिशन की अतिरिक्त सचिव और प्रबंध निदेशक आराधना पटनायक ने राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति और प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। वहीं, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी डिवीजन से मिली जानकारियों ने चर्चा को दिशा दी।
एम्स नई दिल्ली की डॉ. उर्वशी बी. सिंह ने इस सत्र का समन्वय किया। इसमें देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नीति निर्माता शामिल हुए। चर्चा के दौरान स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स, इलाज, रोकथाम, पोषण, सामाजिक सुरक्षा और तकनीक जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों पर गहन मंथन हुआ।
विशेषज्ञों ने शुरुआती चरण में ही टीबी की पहचान के लिए स्क्रीनिंग को तेज करने, नए और सटीक डायग्नोस्टिक टूल अपनाने और इलाज की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया। साथ ही मरीजों के पोषण सहयोग, सामाजिक भेदभाव रोकने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचाने पर भी बात हुई।
सत्र में डिजिटल निगरानी, डेटा एनालिटिक्स और एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल कर टीबी के मामलों को ट्रैक करने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक की मदद से मरीजों की दवा नियमितता और फॉलोअप बेहतर हो सकता है। रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान, भीड़भाड़ वाले इलाकों में जांच और उच्च जोखिम वाले समूहों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई।
नीति आयोग के इस विचार-मंथन का मुख्य उद्देश्य टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को और तेज करना है। सत्र में आए सुझावों को संकलित कर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि नीतियों में जरूरी बदलाव किए जा सकें।
--आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
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