नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे ने पिछले आठ महीनों में कई मासूमों की जान ले ली है। इसका अहम कारण नियमित टीकाकरण में आई कमी को बताया जा रहा है। मार्च के मध्य में प्रकोप शुरू होने के बाद से अब तक खसरे के 2,02,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए और इस दौरान 1,147 लोगों की मौत हुई।
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नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे ने पिछले आठ महीनों में कई मासूमों की जान ले ली है। इसका अहम कारण नियमित टीकाकरण में आई कमी को बताया जा रहा है। मार्च के मध्य में प्रकोप शुरू होने के बाद से अब तक खसरे के 2,02,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए और इस दौरान 1,147 लोगों की मौत हुई।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों का हवाला देते हुए, 'द जापान टाइम्स' की एक रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल बांग्लादेश में "किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक संदिग्ध मामले" सामने आए हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कुल संदिग्ध मामलों में से 22,000 मामलों की पुष्टि प्रयोगशाला जांच (लैब टेस्ट) से हुई है, और मरने वालों में 94 प्रतिशत बच्चे पांच साल से कम उम्र के हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, "बांग्लादेश का हाल दिखाता है कि जब टीकाकरण कवरेज 95 प्रतिशत से नीचे चला जाता है, तो किसी बीमारी के प्रकोप को रोकना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, प्रकोप को रोकने के लिए 95 प्रतिशत कवरेज जरूरी है। हाल के वर्षों में बांग्लादेश ने यह लक्ष्य लगभग हासिल कर लिया था, लेकिन 2025 में गिरावट आई।"
विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण कवरेज में कमी, आंकड़ों (डेटा) की कमजोर स्थिति और लोगों तक पहुंच की कमी ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है।
टीकाकरण कराने वाले लोगों की संख्या लक्ष्य से 100 प्रतिशत से भी अधिक रही, जिससे पता चलता है कि खुराक (डोज) की गिनती या लक्ष्य तय करने में कोई गलती हुई है। यूनिसेफ और बांग्लादेश सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, 40 प्रतिशत बच्चों का पंजीकरण ही नहीं हुआ था, जबकि सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि स्वास्थ्य कर्मियों के लगभग एक-तिहाई पद खाली पड़े हैं।
डब्ल्यूएचओ के दस्तावेजों और वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य कर्मियों तथा अधिकारियों से बातचीत से पता चला है कि गलत आंकड़ों के कारण बांग्लादेश में आपातकालीन स्थिति से निपटने की क्षमता भी कमजोर रही, जिससे लाखों बच्चे छूट गए।
रिपोर्ट में पूर्वोत्तर सिलहट क्षेत्र के एक मामले का जिक्र है, जहां दो साल के अरमान हुसैन की जुलाई में मौत हो गई। उसे टीका नहीं लगा था। परिवार ने अपना तीन पहियों वाला ऑटो-रिक्शा बेचकर उसके इलाज का खर्च उठाया था, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर ही उसकी मौत हो गई। उसके पिता ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मी उनके दूर-दराज के गांव तक नहीं पहुंच पाए थे।
सितंबर में बांग्लादेश में औसतन हर दिन 1,198 नए मामले सामने आए, जो मई के बाद से सबसे अधिक संख्या है।
डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ के अनुमान के अनुसार, 2025 में पहली खुराक का कवरेज गिरकर 90 प्रतिशत और दूसरी खुराक का कवरेज 86 प्रतिशत रह गया। यह 'हर्ड इम्युनिटी' (सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता) के लिए जरूरी 95 प्रतिशत के स्तर से काफी कम है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए भी टीकाकरण अभियान बढ़ाने का आग्रह किया है, क्योंकि खसरे (मीजल्स) के कुल मामलों में से एक-तिहाई मामले इसी आयु वर्ग के बच्चों में देखे गए हैं।
--आईएएनएस
केआर/
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