
नई दिल्ली. भारत में डिजिटल दुनिया के नियम आज से पूरी तरह बदल गए हैं. 20 फरवरी 2026 से केंद्र सरकार के नए आईटी नियम प्रभावी हो गए हैं, जिसके तहत अब हर एआई (AI) जनरेटेड कंटेंट पर 'लेबल' लगाना अनिवार्य होगा. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अब किसी भी आपत्तिजनक या भ्रामक डीपफेक कंटेंट को हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर महज 3 घंटे कर दी गई है.
नए नियमों के मुख्य प्रावधान
1. ऑथेंटिसिटी लेबल: "क्या असली है, क्या बनावटी?"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल न्यूट्रिशन लेबल' के सुझाव को अमलीजामा पहनाते हुए अब हर एआई वीडियो, ऑडियो और फोटो पर "AI जनरेटेड" का लेबल होना जरूरी है. यह ठीक उसी तरह काम करेगा जैसे खाद्य पदार्थों पर शाकाहारी या मांसाहारी के निशान होते हैं.
2. डिजिटल डीएनए (मेटाडेटा) से सुरक्षा
अब कंटेंट के साथ तकनीकी मार्कर या मेटाडेटा जोड़ना अनिवार्य होगा. यह फाइल के भीतर छिपा वह 'डिजिटल डीएनए' होगा जो बताएगा कि:
कंटेंट किस तारीख को बना.
किस AI टूल का उपयोग किया गया.
सबसे पहले किस प्लेटफॉर्म पर अपलोड हुआ.
यदि कोई इस लेबल या मेटाडेटा से छेड़छाड़ करता है, तो प्लेटफॉर्म को उस पोस्ट को तुरंत डिलीट करना होगा.
3. 3 घंटे की 'डेडलाइन' और सख्त एक्शन
पहले कंपनियों को शिकायत मिलने पर कार्रवाई के लिए 36 घंटे मिलते थे, लेकिन अब डीपफेक और अश्लील कंटेंट के मामलों में केवल 3 घंटे का समय मिलेगा. चाइल्ड पोर्नोग्राफी, धोखाधड़ी और हथियारों से जुड़ी एआई जानकारी फैलाने पर इसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है.
प्लेटफॉर्म्स की बढ़ी जिम्मेदारी
अब सोशल मीडिया कंपनियां सिर्फ एक 'कैरियर' नहीं रहेंगी. उन्हें यूजर्स से यह डिक्लेरेशन लेना होगा कि कंटेंट एआई से बना है या नहीं. यदि कोई प्लेटफॉर्म बिना डिस्क्लोजर के ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देता है, तो कानूनी तौर पर वह खुद जिम्मेदार माना जाएगा.
मंत्रालय का विजन: सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इन नियमों का उद्देश्य इंटरनेट को 'ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल' बनाना है, ताकि चुनावों में हेरफेर और गलत सूचनाओं पर लगाम कसी जा सके.
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