भुवनेश्वर, 9 जुलाई (आईएएनएस)। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने गुरुवार को कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च से अब तक अनाथ हुए 50,000 से अधिक बच्चों को वित्तीय सहायता न मिलने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
![]()
भुवनेश्वर, 9 जुलाई (आईएएनएस)। विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने गुरुवार को कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च से अब तक अनाथ हुए 50,000 से अधिक बच्चों को वित्तीय सहायता न मिलने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
एक प्रेस विज्ञप्ति में, क्षेत्रीय पार्टी ने कोविड-19 महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों को वित्तीय सहायता न मिलने के लिए राज्य सरकार की निंदा की।
पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार न केवल बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विधवाओं को पेंशन देने में विफल रही है, बल्कि कोविड-19 महामारी के दौरान अनाथ हुए छोटे बच्चों को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करने में भी अमानवीय रूप से विफल रही है।
एक प्रेस विज्ञप्ति में, मीडिया समन्वयक और प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान राज्य में 50,000 से अधिक बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया और अनाथ हो गए।
उनकी देखभाल और पालन-पोषण के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आशीर्वाद योजना शुरू की, जिसके तहत राज्य सरकार ने ऐसे बच्चों को मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की। मोहंती ने बताया कि कोविड के कारण अपने दोनों माता-पिता को खो चुके बच्चों को 2,500 रुपए प्रति माह दिए जा रहे थे, जबकि अपने माता-पिता में से किसी एक को खो चुके बच्चों को 1,500 रुपए प्रति माह मिल रहे थे।
उन्होंने आगे बताया कि यह मासिक वित्तीय सहायता सीधे अनाथ बच्चों की देखभाल करने वाले रिश्तेदारों के बैंक खातों में या उन संस्थानों में जमा की जाती थी जहां बच्चे रहते थे।
मोहंती ने कहा कि हालांकि, इस साल मार्च से सरकार ने यह वित्तीय सहायता देना बंद कर दिया है, जिससे इन बच्चों की देखभाल और पालन-पोषण में गंभीर संकट पैदा हो गया है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी आशीर्वाद योजना को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा वित्तीय सहायता बंद करने के कारण वे अब अपनी बेबसी जाहिर कर रहे हैं।
विपक्षी बीजद ने राज्य सरकार से मासिक वित्तीय सहायता के साथ-साथ बकाया राशि भी तुरंत जारी करने की मांग की है।
--आईएएनएस
एमएस/
Leave A Reviews