वाशिंगटन, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के न्याय विभाग ने बुधवार को आरोप लगाया कि ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज ने दाखिला प्रक्रिया में एशियाई और श्वेत आवेदकों के साथ भेदभाव किया। विभाग का कहना है कि कॉलेज की प्रवेश प्रणाली अश्वेत उम्मीदवारों को ज्यादा फायदा पहुंचा रही थी और कुछ आवेदकों को सामान्य जांच या इंटरव्यू प्रक्रिया से गुजरे बिना ही प्रवेश दिया गया।
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वाशिंगटन, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका के न्याय विभाग ने बुधवार को आरोप लगाया कि ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज ने दाखिला प्रक्रिया में एशियाई और श्वेत आवेदकों के साथ भेदभाव किया। विभाग का कहना है कि कॉलेज की प्रवेश प्रणाली अश्वेत उम्मीदवारों को ज्यादा फायदा पहुंचा रही थी और कुछ आवेदकों को सामान्य जांच या इंटरव्यू प्रक्रिया से गुजरे बिना ही प्रवेश दिया गया।
न्याय विभाग के सिविल राइट्स डिवीजन ने 2023, 2024 और 2025 की प्रवेश कक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच के बाद अपने निष्कर्ष जारी किए।
विभाग के अनुसार, यह व्यवस्था संघीय नागरिक अधिकार कानून और 2023 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लंघन करती है, जिसमें नस्ल के आधार पर विश्वविद्यालयों में दाखिला देने पर रोक लगाई गई थी।
हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया कि ये जांच के निष्कर्ष हैं, कोई अदालत का फैसला नहीं। अगर कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो पहले समझौते के जरिए बदलाव करवाने की कोशिश की जाएगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो मुकदमा दायर किया जा सकता है।
जांच में पाया गया कि जिन अश्वेत आवेदकों ने स्क्रीनिंग और इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी की थी, उनके चयन की संभावना समान योग्यता वाले एशियाई उम्मीदवारों की तुलना में लगभग 2.8 गुना अधिक थी।
विभाग ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज में एक अलग प्रवेश मार्ग चलाया जा रहा था, जिसके तहत कुछ उम्मीदवारों को बिना स्क्रीनिंग स्कोर या बिना इंटरव्यू दिए ही दाखिला मिल गया।
सिविल राइट्स डिवीजन की प्रमुख और सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों ने कहा, "किसी भी विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया और उसके सभी चरण सभी आवेदकों पर समान रूप से लागू होने चाहिए, चाहे उनकी नस्ल कुछ भी हो।"
उन्होंने कहा, "नस्ल के आधार पर अलग प्रवेश प्रक्रिया चलाना संघीय कानून के तहत स्पष्ट रूप से गैरकानूनी है। यह विभाग ऐसी प्रथाओं को ओएसयू मेडिकल कॉलेज या किसी अन्य संघीय धन प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थान में जारी नहीं रहने देगा।"
न्याय विभाग के अनुसार, मेडिकल कॉलेज ने अल्प-प्रतिनिधित्व वाले अल्पसंख्यक समुदायों से अधिक छात्रों को प्रवेश देने के लिए एक तथाकथित 'होलिस्टिक अप्रोच' अपनाई थी।
इस प्रणाली के तहत, उम्मीदवारों का मूल्यांकन तीन श्रेणियों में किया जाता था, जिनके लिए अलग-अलग अधिकतम अंक तय थे: गुण- अधिकतम 12 अंक, अनुभव- अधिकतम 16 अंक और मेट्रिक्स- अधिकतम 8 अंक। इसके अलावा प्रवेश प्रक्रिया में इंटरव्यू का चरण भी शामिल था।
जांच रिपोर्ट में उन उम्मीदवारों के साथ हुए व्यवहार को भी शामिल किया गया, जिन्होंने सामान्य स्क्रीनिंग और इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी की थी और उन मामलों को भी जिनमें कुछ लोगों को इन चरणों में से किसी एक के बिना ही प्रवेश दिया गया।
न्याय विभाग ने कहा कि वह जांच जारी रखेगा कि मेडिकल स्कूल संघीय भेदभाव-रोधी नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। विभाग का कहना है कि वह पहले बातचीत और समझौते के जरिए संस्थानों को नियमों के अनुरूप लाने की कोशिश करेगा। यदि यह प्रयास सफल नहीं होता, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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