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ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन त्रासदी: सात प्रसूताओं की मौत के बाद राष्ट्रीय स्तर पर जांच, निर्माता कंपनी का लाइसेंस रद्द


जयपुर. राजस्थान में प्रसव के बाद सात महिलाओं की संदिग्ध मौत के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर का गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है। मामले की जांच के बाद केंद्र सरकार ने संदिग्ध ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी भारत सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

जांच में सामने आया कि अमृतसर स्थित एम/एस जैक्सन लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित 'टोसिन' (ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन 5 एमएल) गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की प्रयोगशाला जांच में पाया गया कि इंजेक्शन में निर्धारित मात्रा में सक्रिय तत्व ऑक्सीटोसिन मौजूद नहीं था।

रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश स्थित कंपनी के विनिर्माण संयंत्रों का निरीक्षण किया। जांच के बाद कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई, जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वीकार कर लिया।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजस्थान सरकार से पूरे मामले की विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट भी तलब की है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत से यह जानकारी मांगी है कि क्या इस तरह की घटनाएं देश के अन्य हिस्सों में भी हुई हैं और दोषपूर्ण दवाओं की आपूर्ति कहीं अन्य राज्यों तक तो नहीं पहुंची।

जिन सात महिलाओं की मौत की जांच की जा रही है, उनमें पायल (5 मई, न्यू मेडिकल हॉस्पिटल, कोटा), ज्योति (7 मई), प्रिया महावर (9 मई, जे.के. लोन अस्पताल, कोटा), पिंकी महावर (10 मई), शिरीन (17 मई, न्यू मेडिकल हॉस्पिटल, कोटा), प्रीति (19 जून, पीबीएम अस्पताल, बीकानेर) और शारदा नायक (21 जून, पीबीएम अस्पताल, बीकानेर) शामिल हैं।

जांच एजेंसियों का ध्यान प्रसव के दौरान महिलाओं को दी जाने वाली दवाओं पर गया, जिसमें संदिग्ध 'टोसिन' ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन प्रमुख रूप से सामने आया। प्रयोगशाला जांच में इसकी गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

ऑक्सीटोसिन मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं में से एक है। इसका उपयोग प्रसव पीड़ा शुरू कराने, प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव रोकने तथा गर्भपात के बाद गर्भाशय को संकुचित करने के लिए किया जाता है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी मां और नवजात, दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

अब जांच एजेंसियां दवा की सप्लाई चेन, विभिन्न बैचों के वितरण रिकॉर्ड और अस्पतालों की खरीद प्रणाली की भी पड़ताल कर रही हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या सातों महिलाओं की मौत का सीधा संबंध इस घटिया गुणवत्ता वाले इंजेक्शन से था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दवा गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और कैसे मजबूत बनाया जा सकता है।

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