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ओमान तट पर एक अन्य भारतीय नाविक की मौत, भारतीय दूतावास ने पीड़ित परिवार के प्रति जताया शोक


नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। ओमान के तट पर एक जहाज पर सवार 35 साल के भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की गुरुवार को मौत हो गई। इसकी जानकारी ओमान में भारतीय दूतावास ने दी और बताया कि लगातार शिप मैनेजमेंट कंपनी के संपर्क में हैं।

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। ओमान के तट पर एक जहाज पर सवार 35 साल के भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की गुरुवार को मौत हो गई। इसकी जानकारी ओमान में भारतीय दूतावास ने दी और बताया कि लगातार शिप मैनेजमेंट कंपनी के संपर्क में हैं।

ओमान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "एक भारतीय नागरिक निशांत उर्थनाथन का स्वास्थ्य परेशानियों की वजह से निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर अभी दुकम पोर्ट पर एमटी सेलेस्टियल पर है।"

दूतावास ने आगे कहा कि एंबेसी लगातार शिप मैनेजमेंट कंपनी के संपर्क में है और सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर काम कर रही है। पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। इस मुश्किल समय में पीड़ित परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नाविक निशांत को समय पर मेडिकल मदद नहीं मिली, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच हमलों और संघर्ष का असर दुनिया के अन्य देशों पर हो रहा है। ओमान तट के पास अमेरिका की ओर से कई जहाजों को निशाना बनाया गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुद्र क्षेत्र में जारी तनाव के बीच निशांत की तबीयत बिगड़ गई और हमलों के बीच उन्हें उचित स्वास्थ्य सुविधा मुहैया नहीं हो सकी और उनकी मौत हो गई।

फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआई) ने मामले की जानकारी देते हुए कहा, "नाविकों के लिए एक और दुखद घटना। एमटी सेलेस्टियल के दूसरे अधिकारी की 11 तारीख को शाम 6 बजे समय पर मेडिकल मदद न मिलने की वजह से मौत हो गई। दो दिन बाद भी, पार्थिव शरीर जहाज पर ही है। ओमान के पोर्ट दुकम ने वाई-फाई/कम्युनिकेशन बंद कर दिया है और अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। नाविकों की परवाह कौन करता है? वे दुनिया भर का व्यापार चलाते हैं, लेकिन उन झगड़ों में मेडिकल देखभाल और वापसी में अनदेखी का सामना करते हैं जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं होता।"

बता दें, एफएसयूआई, भारतीय नाविकों और मर्चेंट नेवी के कर्मचारियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाला देश का सबसे बड़ा और पुराना व्यापार संघ है।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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