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ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन' प्रगत‍ि पर, अब ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकाने होंगे तबाह: इजरायली पीएमओ प्रवक्ता (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

तेल अवीव, 6 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता डेविड मेंसर ने आईएएनएस के साथ विशेष साक्षात्कार में ऑपरेशन 'रोरिंग लायन' की बेहतरीन प्रगति के बारे में बताया।

तेल अवीव, 6 मार्च (आईएएनएस)। इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता डेविड मेंसर ने आईएएनएस के साथ विशेष साक्षात्कार में ऑपरेशन 'रोरिंग लायन' की बेहतरीन प्रगति के बारे में बताया।

मेंसर ने कहा क‍ि ऑपरेशन 'रोरिंग लायन' प्रगति पर है, क्‍योंक‍ि ईरान के खिलाफ संघर्ष का छठा दिन शुक्रवार को पूरा हो गया। ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल साइटें, जो इजरायल और क्षेत्र के अन्य देशों के लिए खतरा थीं, उन्हें नष्ट कर दिया गया है। यह ऑपरेशन इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) और अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ शुरू किया गया था।

उन्होंने बताया कि आईडीएफ अब ऑपरेशन के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें ईरान में भूमिगत मिसाइल स्थानों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का आतंकवाद के प्रति एक जैसी 'जीरो-टॉलरेंस' नीति है।

सवाल: आप वर्तमान स्थिति का वर्णन कैसे करेंगे?

जवाब: इस युद्ध के छठे दिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि हम अपने अमेरिकी सहयोगियों के साथ मिलकर जबरदस्त प्रगति कर रहे हैं। हमने ईरानी मिसाइल साइटों, विशेष रूप से बैलिस्टिक मिसाइल साइटों को नष्ट करने में प्रगति की है, जो इस देश के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। लेकिन यह खतरा यूरोप, साइप्रस और हमारे पड़ोसी देशों के लिए भी है। असल में प्रधानमंत्री और अमेर‍िकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंंप ने हाल ही में बातचीत की थी। हम निश्चित रूप से समय से आगे हैं, लेकिन अभी भी अधिक करना बाकी है।

सवाल: इस स्थिति की संभावित समय-सीमा क्या है? क्या ईरान में शासन परिवर्तन भी संभव है?

जवाब: इजरायल और अमेरिका जो कर रहे हैं वह एक अवसर खोलने जैसा है। हम ईरानी जनता को स्वतंत्रता हासिल करने का अवसर दे रहे हैं। पिछले 47 वर्षों से वे इस ईरानी आतंकी शासन के अधीन रहे हैं। उन्होंने अपने ही लोगों को आतंकित किया। उनके 80 प्रतिशत लोग इसे नापसंद करते हैं। जब हमने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और ईरान के शीर्ष 40 नेताओं को हटाया तो लोग जश्न मना रहे थे। हम एक अवसर पैदा कर रहे हैं, जिससे ईरानी लोग स्वतंत्रता पा सकते हैं और बदलाव ला सकते हैं। इस पीढ़ी के ल‍िए यह एक अवसर की तरह हैं। शायद दोबारा न म‍िले।

सवाल: क्या तेहरान के साथ संवाद की संभावना है?

जवाब: राष्ट्रपति ट्रंंप इस ट्रैक का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि संभावना है, लेकिन हमने अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ से सुना कि उनके ईरानी समकक्षों ने कहा कि उनके पास 11 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त सामग्री है। ऐसे में मुझे लगता है कि ईरान का नजरिया शायद इंसानियत के इतिहास में सबसे बेवकूफी भरे डिप्लोमैटिक कदमों में से एक है, इसलिए हम अपने मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं, क्योंकि हम जानते हैं कि फासीवादी, तानाशाही शासन के बिना एक इलाका पूरी दुनिया के लिए बेहतर है।

सवाल: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल शक्ति का कोई आकलन है?

जवाब: हमने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। आईडीएफ ऑपरेशन के दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है, विशेष रूप से भूमिगत मिसाइलों को निशाना बना रहा है जो जमीन के नीचे छिपी हैं। ये मिसाइलें न केवल इजरायल बल्कि यूरोप के लिए भी खतरा हैं। हम जानते हैं कि‍ ईरान का इरादा अमेरिका के साथ-साथ यूरोप के दूसरे देशों को भी नुकसान पहुंचाने का है। हम यह नहीं होने देंगे। हम अमेरिकी साझेदारों के साथ मिलकर दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों को सबसे खतरनाक शासन के हाथों में नहीं होने देंगे।

सवाल: ईरान को आत्मसमर्पण करने में और कितने दिन लग सकते हैं?

जवाब: हम तब तक जारी रहेंगे जब तक काम पूरा नहीं हो जाता। यह तुरंत नहीं होने वाला है। ईरान एक बड़ा देश और जटिल समाज है, लेकिन ईरान की जनता स्वतंत्रता की हकदार है। ईरान में 90 मिलियन लोग हैं। हमने पहले ही ईरान में सबसे महत्वपूर्ण स्थलों को निशाना बनाया है, जहां सैन्य मुख्यालय, पुलिस मुख्यालय और आईआरजीसी मुख्यालय हैं। हमारी प्रगति जबरदस्त है और हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि यह तब तक चलेगा जब तक आवश्यक हो।

सवाल: ईरान के अगले नेतृत्व के बारे में इजरायल की राय क्या है?

सवाल: यह ईरानी जनता का निर्णय है। हम अवसर प्रदान कर रहे हैं। ईरानी लोग सही समय पर उठकर इस अवसर का उपयोग कर सकते हैं। हमने जनवरी में दो दिनों में ही देखा था कि ईरानी सरकार ने 30 हजार से ज्यादा लोगों को बेरहमी से, भयानक तरीके से मार डाला था। अब हम ईरानी लोगों के लिए यह मौका बना रहे हैं। सही समय पर वे उठ खड़े होंगे और उस रास्ते से गुजरेंगे जो अमेरिकी और इजरायली कार्रवाई ने उनके लिए बनाया है। हमें उम्मीद है कि वे इसे अपनाएंगे, क्योंकि यह एक बार मिलने वाला अवसर है।

सवाल: क्या ईरान में वास्तविक समय में शासन-परिवर्तन संभव है?

जवाब: हम ईरानी लोगों के लिए अपना भविष्य अपने हाथों में लेने का मौका बना रहे हैं, और हमें उम्मीद है कि वे इसे अपनाएंगे। उन्हें 47 साल से तानाशाही शासन के अधीन रहने के बाद यह अवसर मिला है। ईरानी लोग बुद्धिमान हैं। उनके पास वैज्ञानिक, कवि और प्रतिभाशाली लोग हैं। उनके संसाधनों का उपयोग उनकी इच्छा पूरी करने में लगा दिया गया। वे कहते हैं, 'इजरायल की मौत और अमेरिका की मौत।' उन्होंने उन संसाधनों को दूसरी जगह लगा दिया। हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि ऐसा अब संभव न हो।

सवाल: कुवैत में अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया गया। इसके पीछे कौन था?

जवाब: मेरे पास जो लेटेस्ट रिपोर्ट है, उसके मुताबिक यह एक फ्रेंडली फायर था, बदकिस्मती से कुवैती डिफेंसिव एक्शन का एक दुर्भाग्यपूर्ण फ्रेंडली फायर उदाहरण और जाहिर है कि अमेरिका इसकी जांच कर रहे हैं, लेकिन मेरे पास जो लेटेस्ट जानकारी है, वह यह है कि यह एक फ्रेंडली फायर की घटना है।

सवाल: क्या ईरान से किसी प्रकार का शांति संदेश मिला है?

जवाब: अगर आप मुझसे पूछ रहे हैं कि क्या मौजूदा ईरानी शासन शांति में रुचि रखता है तो मेरा मानना है कि पिछले 47 वर्षों में उन्होंने अपनी मंशा साफ दिखा दी है। वे बहुत स्पष्ट रूप से कहते हैं, 'इजरायल की मौत।' वे ऐसी बातें कहते हैं तो यहूदी लोगों का अनुभव यही रहा है कि उनकी बातों पर विश्वास किया जाए। हम वही मानते हैं जो वे कहते हैं। दुनिया में कई बार लोगों ने यहूदियों के विनाश की बात की, लेकिन दुनिया में केवल एक देश ऐसा रहा है, जहां ऐसा नहीं हुआ, और वह है भारत। यही कारण है कि हमारे दोनों देशों के बीच इतना मजबूत संबंध है। भारत में कभी भी यहूदी-विरोध नहीं रहा है और यही एक कारण है कि हमारे दोनों देश एक-दूसरे के इतने करीब हैं।

सवाल: क्या इजरायल ईरान के साथ लंबी लड़ाई करने की क्षमता रखता है?

जवाब: यह क्षमता का नहीं है, बल्कि आवश्यकता का सवाल है। ईरान इस देश के लोगों के विनाश की बात करता है। उन्होंने 7 अक्टूबर को अपने प्रॉक्सी हमास के माध्यम से इस देश पर हमला करने की कोशिश की। उन्होंने अपने प्रॉक्सी हिज्बुल्लाह के जरिए इस देश को नष्ट करने की कोशिश की और अपने प्रॉक्सी हूती के माध्यम से हम पर मिसाइलें दागीं, इसलिए यह आवश्यकता का मामला है। यह युद्ध इजरायल राज्य के दीर्घकालिक भविष्य की रक्षा के लिए है, क्योंकि दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार कभी भी दुनिया के सबसे खतरनाक शासन के हाथों में नहीं होने चाहिए। हम अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहते हैं। यही कारण है कि अब्राहम समझौते इतने महत्वपूर्ण हैं। जब ईरान का यह खतरा समाप्त हो जाएगा और ईरान के लोगों को स्वतंत्रता मिल जाएगी, तब हम इस क्षेत्र के सभी पड़ोसी देशों के साथ और बेहतर संबंधों की उम्मीद करते हैं।

सवाल: क्या खाड़ी देशों से समर्थन मिल रहा है?

जवाब: देखिए, इस बारे में मैं सीमित ही बात कर सकता हूं, लेकिन इतना कह सकता हूं कि इजरायली सरकार इस क्षेत्र के अपने सभी पड़ोसी देशों के संपर्क में है। मेरा मानना है कि लगभग सभी देश ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरे से प्रभावित हुए हैं। मुझे नहीं लगता कि इसमें किसी को कोई संदेह है कि इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई, हमारी साझेदारी, इस पूरे क्षेत्र को यहां के हर देश के लिए अधिक सुरक्षित बना रही है। इसका मतलब यह है कि जब हम अपना काम पूरा कर लेंगे, हम ईरान की परमाणु क्षमता, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उसकी प्रॉक्सी सेनाओं के जरिए चुनौती देने की क्षमता को निष्क्रिय कर देंगे, तो हम शांति की ओर आगे बढ़ सकेंगे। हमारे प्रधानमंत्री पहले ही अब्राहम समझौतों के माध्यम से इस क्षेत्र के कई देशों के साथ महत्वपूर्ण शांति समझौते कर चुके हैं, लेकिन हम इससे भी आगे जा सकते हैं, और हमारे प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हम और भी बहुत कुछ हासिल करेंगे।

सवाल: श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाने पर सवाल उठ रहे हैं।

जवाब: अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट रूप से बताया कि उन्होंने वह कार्रवाई क्यों की। इजरायल, स्वाभाविक रूप से उस कार्रवाई का समर्थन करता है। यह पहली बार है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने किसी दुश्मन के युद्धपोत को नष्ट किया है। हम अपने साझेदार अमेरिका के साथ मिलकर मानते हैं कि अमेरिका द्वारा की गई यह कार्रवाई पूरी तरह से उचित थी। हम इस युद्ध में साथ हैं और मिलकर ईरानी मिसाइलों, उनकी परमाणु क्षमता और उनके प्रॉक्सी संगठनों को मिलने वाले समर्थन जैसे खतरे को समाप्त करने के लिए काम कर रहे हैं।

सवाल: क्या इस बारे में कोई जानकारी थी कि ईरानी युद्धपोत सैन्य गतिविधियों में शामिल था?

जवाब: वह ईरानी युद्धपोत ईरान की सशस्त्र सेनाओं का हिस्सा था, जो खामेनेई शासन के अधीन और उसके नियंत्रण में हैं, इसलिए वह निश्चित रूप से एक खतरा था। इस पूरी चर्चा में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ईरानी शासन नियमित रूप से अपनी महत्वाकांक्षाएं खुलकर जाहिर करता है। वे कहते हैं 'अमेरिका की मौत।' यह स्पष्ट धमकी है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, जब किसी दूसरे देश से आपको खतरा होता है तो आपको उस खतरे की सैन्य क्षमता को निष्क्रिय करने का पूरा अधिकार होता है, और ठीक यही हमारे अमेरिकी साझेदारों ने किया, लेकिन अगर आपको इसके बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो आपको सीधे अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर से संपर्क करना चाहिए। इजरायल के दृष्टिकोण से, हां, हम उस कार्रवाई का समर्थन करते हैं, क्योंकि उसने ईरानी शासन की सैन्य शक्ति से उत्पन्न एक खतरे को निष्क्रिय किया है।

सवाल: भारतीय नेतृत्व की भूमिका को कैसे देखते हैं?

जवाब: देखिए, मैं बस इतना कह सकता हूं कि मुझे अपने प्रधानमंत्री के साथ रहने का गर्व मिला, जब उन्होंने कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया था। हम उनके दो दिन के दौरे पर उन्हें लेने के लिए हवाई अड्डे भी गए थे। मैं यह शब्दों में नहीं बता सकता कि प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते समय हम एक राष्ट्र के रूप में कितने भावुक हो गए थे। जब प्रधानमंत्री मोदी ने हमारे नेसेट (इजरायल की संसद) को संबोधित किया, तब मुझे नहीं लगता कि उस सदन में किसी की आंखें सूखी थीं। उन्होंने जो बातें कहीं, जो नेतृत्व दिखाया और जो समझ प्रदर्शित की, वह बहुत प्रभावशाली थी। वह वैसा समझते हैं जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी समझते हैं कि आतंकवाद के प्रति शून्य-सहनशीलता का रवैया होना चाहिए। जब आप आतंकवादियों को तुष्ट करते हैं, तो उससे केवल और अधिक युद्ध होता है। आतंकवादी राज्यों का सामना करना और उन्हें हराना जरूरी है, और ठीक यही हम कर रहे हैं।

सवाल: पीएम मोदी और इजरायली पीएम के बीच मित्रता?

जवाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले हफ्ते ही यहां आए थे। यह एक बहुत ही सफल दौरा था। जब उन्होंने हमारी संसद में कहा, “अम यिसराएल चाई' वह क्षण मैं कभी नहीं भूलूंगा, क्योंकि इसका अर्थ है, 'इजरायल की जनता जीवित है।' अंतरराष्ट्रीय मीडिया का एक बड़ा हिस्सा अक्सर इजरायल को अलग-थलग दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। हमारे साथ अमेरिका और कई अन्य देशों जैसे साझेदार हैं, लेकिन इससे भी बढ़कर, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 1.5 अरब भारतीय आतंकवादी ताकतों के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमारे साथ हैं। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सोच एक जैसी है। आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस ही सफलता दिलाती है। दोनों नेता, राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मिलकर, 'शक्ति के माध्यम से शांति' में विश्वास रखते हैं। पहले शक्ति आती है, फिर शांति आती है, और हम अभी इसे वास्तविकता में होते हुए देख रहे हैं।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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