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पाकिस्तान में इलाज शुरू करने के बाद 20,000 से ज्यादा एचआईवी मरीज लापता


इस्लामाबाद, 8 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में एचआईवी से संक्रमित 84,000 पंजीकृत लोगों में से 20,000 से ज्यादा मरीज एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी शुरू करने के बाद "लापता" हो गए हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

इस्लामाबाद, 8 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान में एचआईवी से संक्रमित 84,000 पंजीकृत लोगों में से 20,000 से ज्यादा मरीज एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी शुरू करने के बाद "लापता" हो गए हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के एक संपादकीय के अनुसार, पाकिस्तान डब्ल्यूएचओ के पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में एचआईवी महामारी के सबसे तेजी से बढ़ते हॉटस्पॉट में से एक के रूप में उभरा है। इस क्षेत्र में पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका, हॉर्न ऑफ अफ्रीका और मध्य एशिया के 22 देश शामिल हैं।

इसमें आगे कहा गया है कि पिछले 15 वर्षों में, नए संक्रमणों में 200 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। इनकी संख्या 2010 में 16,000 से बढ़कर 2024 में 48,000 हो गई है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि जन जागरूकता अभियान और नुकसान कम करने की रणनीतियां कोई भी सार्थक परिणाम हासिल करने में असफल रही हैं।

यह भी कहा गया कि रजिस्टर्ड 84,000 लोग देश भर में एचआईवी के साथ जी रहे अनुमानित 3,69,000 लोगों का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा हैं और इस बड़ी आबादी का इलाज न होने की वजह से यह पहचानना लगातार मुश्किल होता जा रहा है कि कौन लोग 'हाई-रिस्क' ग्रुप में आते हैं।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया, "हालांकि, असुरक्षित यौन संबंध और इस्तेमाल की हुई सुइयों से नसों में ड्रग्स लेना अभी भी संक्रमण फैलने के मुख्य कारण हैं, लेकिन दूसरे मेडिकल रास्ते, जैसे असुरक्षित इंजेक्शन लगाने के तरीके, बिना स्टरलाइज किए खून चढ़ाना, संक्रमण रोकने के कमजोर उपाय और बिना रोक-टोक चल रही झोलाछाप डॉक्टरी, बच्चों और जीवनसाथियों में संक्रमण फैलने की वजह बन रहे हैं।"

यह बताते हुए कि बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित समूहों में से एक हैं। 0-14 आयु वर्ग में नए संक्रमणों की संख्या 2010 में 530 से बढ़कर 2023 में 1,800 हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है, "संक्रमण के कई हॉटस्पॉट, जिनमें लरकाना, तौंसा और हैदराबाद शामिल हैं, में बच्चों की संख्या नए पहचाने गए मामलों में 80 प्रतिशत से भी ज्यादा थी। इन संक्रमणों के फैलने के बावजूद, दोबारा इस्तेमाल होने वाली प्रतिबंधित सिरिंज अभी भी बाजार में उपलब्ध हैं और ब्लड बैंक के नियम-कानूनों का पालन ठीक से नहीं हो रहा है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘नेशनल एड्स कंट्रोल प्रोग्राम’, जो काफी हद तक बाहरी मदद पर निर्भर है, अब गंभीर रूप से 'फंड और कर्मचारियों की कमी' से जूझ रहा है। यहां तक कि दान में मिली 8,00,000 डॉलर की सामग्री भी भ्रष्ट स्थानीय लोगों द्वारा चुरा ली गई है।

इस हफ्ते की शुरुआत में, एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि पाकिस्तान में एचआईवी के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी कोई धीरे-धीरे बढ़ने वाली जन-स्वास्थ्य चिंता नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्थागत विफलता है, जो असल समय में सामने आ रही है। एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि बच्चे और कम जोखिम वाले लोग अपने व्यवहार के कारण नहीं, बल्कि उस स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के जरिए एचआईवी से संक्रमित हो रहे हैं, जिसका काम उनकी रक्षा करना है।

पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक अखबार 'डॉन' के एक संपादकीय में बताया गया है कि इस स्थिति के पीछे दो तरह की विफलताएं एक साथ काम कर रही हैं। इसमें कहा गया है, "पहली विफलता हमारे स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क के बड़े हिस्से में संक्रमण नियंत्रण के बुनियादी उपायों का पूरी तरह से ध्वस्त हो जाना है। दूसरी विफलता सिरिंजों का बार-बार इस्तेमाल जारी रहना है, जबकि 2021 में पारंपरिक डिस्पोजेबल सिरिंजों के इस्तेमाल पर पूरे देश में प्रतिबंध लगा दिया गया था। इन दोनों विफलताओं ने मिलकर एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जिसे विशेषज्ञ 'मानव-जनित महामारी' बताते हैं। इसके जो भी सबूत मिले हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं।"

--आईएएनएस

एबीएम/

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