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पाकिस्तान में नरसंहार की आशंका को लेकर चेतावनी, मानवाधिकार उल्लंघनों पर निगरानी बढ़ाने की मांग


इस्लामाबाद, 31 मई (आईएएनएस)। मानवाधिकारों की निगरानी करने वाले संगठन जेनोसाइड वॉच ने पाकिस्तान में बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर नरसंहार (जेनोसाइड) निगरानी की चेतावनी जारी की है। संगठन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान वर्तमान में नरसंहार के तीसरे चरण "भेदभाव" (डिस्क्रिमिनेशन) की स्थिति में है।

इस्लामाबाद, 31 मई (आईएएनएस)। मानवाधिकारों की निगरानी करने वाले संगठन जेनोसाइड वॉच ने पाकिस्तान में बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर नरसंहार (जेनोसाइड) निगरानी की चेतावनी जारी की है। संगठन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान वर्तमान में नरसंहार के तीसरे चरण "भेदभाव" (डिस्क्रिमिनेशन) की स्थिति में है।

रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव समाज में गहराई तक जड़ें जमा चुका है और उनके विरुद्ध हिंसा व्यापक रूप से देखी जा रही है। संगठन ने पाकिस्तान को नरसंहार के तीसरे चरण (भेदभाव) और पांचवें चरण (संगठन) की श्रेणी में रखा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि धार्मिक, लैंगिक और राजनीतिक आधार पर बढ़ते विभाजन, प्रतिबंधात्मक कानून, सेंसरशिप और कमजोर सुरक्षा व्यवस्थाएं देश को छठे चरण "ध्रुवीकरण" (पोलराइजेशन) की ओर ले जा रही हैं। वहीं, कमजोर और संवेदनशील समुदायों के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और विस्थापन जैसी घटनाएं नौवें चरण "उत्पीड़न" (परसिक्यूशन) के संकेत भी दर्शाती हैं।

अमेरिकी मीडिया संस्थान पीजे मीडिया में लिखते हुए तुर्की मूल की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने कहा कि ये चरण उन परिस्थितियों को दर्शाते हैं जो किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह के सुनियोजित विनाश का माहौल तैयार कर सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करने वाले प्रमुख समूहों में ईसाई, हिंदू, बौद्ध, शिया और अहमदिया समुदाय सहित धार्मिक अल्पसंख्यक, राजनीतिक विपक्ष, महिलाएं और समलैंगिक समुदाय शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में महिलाओं को एसिड हमले, जबरन विवाह, बाल विवाह, दुष्कर्म, मानव तस्करी, जबरन धर्म परिवर्तन और घरेलू हिंसा जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

साल 2025 में लाहौर हाई कोर्ट द्वारा यौवन प्राप्ति के बाद विवाह को इस्लामी कानून के तहत वैध मानने के फैसले का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि देश में बाल विवाह अब भी व्यापक रूप से जारी है और लाखों लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले कर दी जाती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान को विश्व आर्थिक मंच के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में सबसे निचले स्थान पर रखा गया है।

जेनोसाइड वॉच ने आरोप लगाया कि पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को सेंसरशिप, धमकियों, हिंसा, गिरफ्तारी और यहां तक कि हत्या जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक विमर्श प्रभावित हो रहा है।

रिपोर्ट में विशेष रूप से पाकिस्तान के ईसाई समुदाय की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है। इसके अनुसार, देश की आबादी में लगभग 1.8 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला यह समुदाय सामाजिक और संस्थागत भेदभाव का सामना कर रहा है।

संगठन ने यूरोपियन यूनियन से आग्रह किया है कि वह जीएसपी+ समीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से पाकिस्तान पर धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े सुधारों को लागू करने के लिए दबाव बनाए।

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त से भी पाकिस्तान को मानवाधिकारों के मामले में "विशेष चिंता वाले देश" के रूप में चिन्हित करने पर विचार करने की अपील की गई है, क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार देश में जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

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