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पंजाब : अकाली दल ने आप विधायक पराशर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में ईडी की जांच की मांग की


चंडीगढ़, 11 मई (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोमवार को पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अशोक कुमार पप्पी पराशर के खिलाफ अपने निजी सहायक के खाते का इस्तेमाल करके मनी लॉन्ड्रिंग समेत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की।

चंडीगढ़, 11 मई (आईएएनएस)। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोमवार को पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अशोक कुमार पप्पी पराशर के खिलाफ अपने निजी सहायक के खाते का इस्तेमाल करके मनी लॉन्ड्रिंग समेत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की।

एसएडी नेता ने यहां मीडिया को बताया कि लुधियाना (सेंट्रल) के विधायक पराशर ने अपने निजी सहायक निखिल सभरवाल को मोहरा बनाकर लुधियाना नगर निगम में संविदा आधार पर नियुक्त होने वाले 87 लोगों और क्लर्क के पदों पर नियुक्त होने वाले 39 लोगों से 1.10 करोड़ रुपए वसूले। उम्मीदवारों को चयनित दिखाने के लिए फर्जी सूचियां बनाई गईं, लेकिन जब घोटाला उजागर हुआ तो विधायक ने अपने निजी सहायक को शहर छोड़ने का आदेश दिया, अन्यथा उसे जान से मार दिया जाएगा।

विधायक पराशर द्वारा किए गए एक और घोटाले का खुलासा करते हुए मजीठिया ने बताया कि विधायक ने दो बार अपने सहायक के खाते में पैसे जमा करवाए और फिर अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से उन्हें निकाल लिया।

उन्होंने बताया कि पहला मामला 8 मार्च, 2024 को हुआ, जब विधायक ने कनाडा में रहने वाले एक व्यक्ति से अपने सहायक के खाते में 90 लाख रुपए जमा करवाए।

उन्होंने बताया कि उसी दिन विधायक की पत्नी मीनु पराशर के खाते में 40 लाख रुपए और अगले दिन मीनु पराशर के खाते में 10 लाख और 25 लाख रुपए स्थानांतरित किए गए।

विधायक द्वारा किए गए एक अन्य अपराध का खुलासा करते हुए मजीठिया ने बताया कि 24 अप्रैल, 2024 को लुधियाना के एक भवन निरीक्षक, हरमिंदर सिंह मक्कर ने विधायक के सहायक के खाते में 30 लाख रुपए जमा करवाए।

उन्होंने बताया कि पहले की कार्यप्रणाली के अनुसार, विधायक पराशर ने अगले ही दिन अपने खाते में 15 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए, जबकि विधायक के बेटे के खाते में 99,000 रुपए ट्रांसफर किए गए।

उन्होंने कहा कि शेष राशि फर्जी बिल बनाकर चुकाई गई। मजीठिया ने बताया कि पराशर ने भवन निरीक्षक हरमिंदर मक्कर के जालंधर तबादले को रद्द करवाने की लिखित सिफारिश करके उनसे अपनी करीबी साबित की और इसमें सफल भी रहे।

--आईएएनएस

एमएस/

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