जालंधर, 1 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने अवैध कॉल सेंटर चलाकर और विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों का नेटवर्क संचालित करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ धन शोधन की जांच के सिलसिले में 187.13 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं। इस जब्ती में हरियाणा, दिल्ली और गोवा में स्थित विभिन्न अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें आलीशान फार्महाउस और विला भी शामिल हैं।
![]()
जालंधर, 1 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने अवैध कॉल सेंटर चलाकर और विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराधों का नेटवर्क संचालित करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ धन शोधन की जांच के सिलसिले में 187.13 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की हैं। इस जब्ती में हरियाणा, दिल्ली और गोवा में स्थित विभिन्न अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें आलीशान फार्महाउस और विला भी शामिल हैं।
ईडी ने सीबीआई द्वारा एफबीआई, संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) से प्राप्त जानकारी के आधार पर बीएनएस 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत अमेरिकी नागरिकों से लाखों डॉलर की धोखाधड़ी करने के आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन की जांच शुरू की।
ईडी की जांच में पता चला कि अवैध कॉल सेंटर (डिजिकैप्स – द फ्यूचर ऑफ डिजिटल) में जिगर अहमद, यश खुराना, इंदरजीत सिंह भाली और निखिल शर्मा सहित 36 कर्मचारी थे। ये सभी लोग जोनी, दक्षय सेठी और गौरव वर्मा की देखरेख में काम करते थे। उन्होंने तकनीकी सहायता कॉल सेंटर सेवा की आड़ में अमेरिकी पीड़ितों को धोखा दिया और इस प्रक्रिया के दौरान पीड़ितों की महत्वपूर्ण जानकारी चुरा ली और उन्हें आईआरएस (अमेरिकी आंतरिक राजस्व सेवा) द्वारा कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। इसके बाद उन्होंने पीड़ितों को अपने पैसे क्रिप्टो खातों में स्थानांतरित करने के लिए प्रेरित किया, जो विदेशी पीड़ितों के खातों से क्रिप्टो वॉलेट में निकाले गए थे और बाद में अपराध की आय को निजी लाभ के लिए ब्लिस इन्फ्राप्रॉपर्टीज एलएलपी नामक फर्जी कंपनियों में स्थानांतरित कर अचल संपत्तियों में निवेश किया गया था।
जनवरी और फरवरी 2026 में ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत पंजाब, हरियाणा और दिल्ली राज्यों में 13 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस तलाशी अभियान के परिणामस्वरूप विभिन्न डिजिटल उपकरण बरामद हुए, 34 लाख रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त की गई और ऐसे आपत्तिजनक रिकॉर्ड मिले जो आरोपियों को भारत और विदेश में उच्च मूल्य के निवेश और अचल संपत्तियों के अधिग्रहण से जोड़ते हैं।
जांच में आगे पता चला कि आरोपियों, जैसे जोनी उर्फ जोनी त्यागी, दक्षय सेठी, राघव सतीहा, निखिल वर्मा, गौरव वर्मा और गौतम ढिंगरा ने अपराध की आय को हरियाणा, दिल्ली और गोवा में अचल संपत्ति में निवेश किया था। तदनुसार, पीएमएलए, 2002 के तहत 187.12 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं। आगे की जांच जारी है।
--आईएएनएस
एमएस/
Leave A Reviews