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परिवर्तन को स्थायी बनाने के लिए शिक्षा में बदलाव जरूरी : गोविंद देव गिरि महाराज


कोलकाता, 7 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने स्कूलों के इतिहास पाठ्यक्रम और मुगल काल के इतिहास की प्रस्तुति को लेकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है और इतिहास को सही एवं संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। देश की शिक्षा प्रणाली में कुछ ऐसे तत्व शामिल हो गए हैं, जो गलत हैं और जिन्हें पुनः समीक्षा कर हटाने की जरूरत है।

कोलकाता, 7 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने स्कूलों के इतिहास पाठ्यक्रम और मुगल काल के इतिहास की प्रस्तुति को लेकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है और इतिहास को सही एवं संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। देश की शिक्षा प्रणाली में कुछ ऐसे तत्व शामिल हो गए हैं, जो गलत हैं और जिन्हें पुनः समीक्षा कर हटाने की जरूरत है।

गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि यह बात वे प्रधानमंत्री मोदी के विचारों और निर्देशों के अनुरूप कह रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही किसी भी समाज और राष्ट्र में स्थायी परिवर्तन लाया जा सकता है। यदि शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जाए और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर किया जाए, तो देश का भविष्य और अधिक मजबूत हो सकता है।

उन्होंने अपने संबोधन के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और राज्य की राजनीतिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम होना चाहिए। समाज में ऐसे प्रतीकों और स्मारकों का संरक्षण और निर्माण किया जाना चाहिए, जो स्थानीय संस्कृति और परंपरा को दर्शाते हों।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कई स्थानों के नामों और ऐतिहासिक संदर्भों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए, विशेषकर उन नामों पर जो विदेशी आक्रमणों या शासन से जुड़े हैं। उनके अनुसार, इस तरह के बदलावों से समाज में अपनी जड़ों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी।

गोविंद देव गिरि महाराज ने अपने संबोधन में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, धर्म और परंपराओं में निहित है और इन्हें मजबूत करना सभी का दायित्व है।

उन्होंने पश्चिम बंगाल के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में सांस्कृतिक चेतना को बढ़ाने की दिशा में जो प्रयास हो रहे हैं, वे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपनी परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक मूल्यों के प्रति जागरूक रहें और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।

--आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम

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