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पटनायक ने जन्माष्टमी पर पुरी समुद्र तट पर 101 माखन हांडियों के साथ बाल गोपाल की रेत से बनाई कलाकृति


पुरी, 4 सितंबर (आईएएनएस)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर सैंड आर्टिस्ट और पद्म श्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने गुरुवार को ओडिशा के पुरी बीच पर बाल गोपाल की भक्तिपूर्ण सैंड स्कल्पचर (रेत की कलाकृति) बनाई। रेत की इस शानदार कलाकृति में "हैप्पी जन्माष्टमी" का संदेश है और इसमें बाल गोपाल को शांत और दिव्य रूप में खूबसूरती से दिखाया गया है।

पुरी, 4 सितंबर (आईएएनएस)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर सैंड आर्टिस्ट और पद्म श्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने गुरुवार को ओडिशा के पुरी बीच पर बाल गोपाल की भक्तिपूर्ण सैंड स्कल्पचर (रेत की कलाकृति) बनाई। रेत की इस शानदार कलाकृति में "हैप्पी जन्माष्टमी" का संदेश है और इसमें बाल गोपाल को शांत और दिव्य रूप में खूबसूरती से दिखाया गया है।

8 फीट ऊंची इस सैंड स्कल्पचर के जरिए पटनायक ने छोटे कृष्ण (बाल गोपाल) को जीवंत कर दिया है और भगवान कृष्ण की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावना का जश्न मनाया है। बाल गोपाल के दिव्य रूप के साथ में उनकी प्यारी बांसुरी, माखन की एक बड़ी हांडी और उनके पास आराम करती एक शांत गाय और गोकुल में कृष्ण के चंचल बचपन की मनमोहक कहानियों की याद दिलाता है।

इस रचना को एक खास अंदाज देते हुए कलाकृति के चारों ओर 101 छोटी-छोटी माखन की हांडियां लगाई गई हैं, जो भक्ति और बाल गोपाल की आनंदमयी भावना का प्रतीक हैं। यह कलाकृति सुदर्शन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट के छात्रों के सहयोग से बनाई गई। पुरी बीच पर रेत से बनी इस कलाकृति ने बड़ी संख्या में पर्यटकों और लोगों का ध्यान खींचा।

पटनायक ने आईएनएएस से बातचीत में कहा, "जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर रेत से भगवान कृष्ण की आकृति बनाई है। इसके साथ 101 माखन की हंडियों को भी दर्शाया है। भगवान श्रीकृष्ण सभी को शांति, खुशी, अच्छी सेहत और समृद्धि का आशीर्वाद दें। बाल गोपाल की दिव्य उपस्थिति हमारे जीवन को प्यार, करुणा, सकारात्मकता और सद्भाव से भर दे।"

पद्म श्री से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने 65 से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय सैंड स्कल्पचर चैंपियनशिप और फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और अपनी कलात्मक उत्कृष्टता के लिए दुनिया भर में पहचान बनाई है। वे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन, प्लास्टिक प्रदूषण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और वैश्विक शांति जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सैंड आर्ट का एक सशक्त माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते रहते हैं।

--आईएएनएस

ओपी/एएस

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