नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों से संबंधित कथित भ्रामक सूचनाओं के प्रसार के बीच प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने गुरुवार को पत्रकारिता के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के दिशा-निर्देशों का समर्थन किया। पीआईबी ने पत्रकारों से जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने और तथ्यों को अटकलों, अनुमानों तथा विचारों से अलग रखने की अपील की।
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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों से संबंधित कथित भ्रामक सूचनाओं के प्रसार के बीच प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने गुरुवार को पत्रकारिता के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के दिशा-निर्देशों का समर्थन किया। पीआईबी ने पत्रकारों से जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने और तथ्यों को अटकलों, अनुमानों तथा विचारों से अलग रखने की अपील की।
पीआईबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “जिम्मेदार पत्रकारिता की शुरुआत तथ्यों को अटकलों, अनुमानों और विचारों से अलग करने से होती है।”
पीआईबी ने आगे कहा कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के ‘पत्रकारिता आचरण के मानदंड, 2022’ के अनुसार, पत्रकारों को तथ्यों की सटीकता बनाए रखनी चाहिए, संपादकीय जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यंग्य तथा टिप्पणी मानहानि की सीमा पार न करें।
ब्यूरो ने इस बात पर जोर दिया कि जिम्मेदार रिपोर्टिंग और जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए तथ्यों, अनुमानों, अटकलों और विचारों के बीच स्पष्ट अंतर करना आवश्यक है। पत्रकारों को अटकलों, अनुमानों या व्यक्तिगत विचारों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।
पीआईबी ने कहा कि अच्छे हास्य के उद्देश्य से बनाए गए कार्टून और व्यंग्यचित्र एक अलग श्रेणी में आते हैं और उनके प्रति अपेक्षाकृत उदार दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। हालांकि, ब्यूरो ने आगाह किया कि व्यंग्य लेखन का एक स्वीकार्य रूप है, लेकिन इसका इस्तेमाल मानहानिकारक बयानों को छिपाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
पीआईबी ने यह भी कहा कि ‘अक्षम’ या ‘नपुंसक’ जैसे शब्दों को राजनीतिक टिप्पणी के संदर्भ में परखा जाना चाहिए, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उनका इस्तेमाल आपत्तिजनक है या नहीं।
इस बीच, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया लगातार प्रेस से रिपोर्टिंग में संयम और सावधानी बरतने की अपील करती रही है। परिषद ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक टिप्पणी में कहा कि ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास होना चाहिए, जिसमें प्रेस आत्म-नियमन के माध्यम से अपनी स्वतंत्रता के इस्तेमाल और अपनी जिम्मेदारी के बीच उचित संतुलन सुनिश्चित करे। परिषद के मुताबिक, यही उसका मूल उद्देश्य है।
प्रेस काउंसिल अधिनियम, 1978 की धारा 13(बी) के तहत परिषद को समाचार पत्रों, समाचार एजेंसियों और पत्रकारों के लिए रिपोर्टिंग के उच्च मानक सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आचार संहिता तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है।
पीसीआई के अनुसार, अपने फैसलों और अन्य घोषणाओं के आधार पर परिषद ने समय के साथ ऐसे सिद्धांत विकसित किए हैं, जिन्हें पत्रकारों से अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करते समय विवेक और आवश्यक परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने की अपेक्षा की जाती है। इन सिद्धांतों का उद्देश्य पत्रकारों को अपने आचरण को स्वयं नियंत्रित करने के लिए मार्गदर्शन देना है।
इससे पहले, दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई ने कथित तौर पर झूठे विमर्श फैलाने और देश के माहौल को बिगाड़ने का प्रयास करने वाले सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ चार से अधिक एफआईआर दर्ज की थीं।
यह घटनाक्रम एसआईआर विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों से संबंधित कथित भ्रामक सूचनाओं के प्रसार के बीच सामने आया है।
--आईएएनएस
डीएससी
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