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पेट को रखना है फिट तो रोज करें ये 10 योगासन, गैस और कब्ज की परेशानी में मिलेगी राहत


नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। आजकल गलत खान-पान और बैठे रहने की आदत के कारण हर दूसरा व्यक्ति पेट की समस्या से परेशान है। गैस, कब्ज, अपच और एसिडिटी जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। कई बार तनाव और नींद की कमी भी पाचन से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा देती है। ऐसे में दवाओं से ज्यादा असरदार है योग। ऐसे में मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) ने स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए 10 योगासन बताए गए हैं।

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। आजकल गलत खान-पान और बैठे रहने की आदत के कारण हर दूसरा व्यक्ति पेट की समस्या से परेशान है। गैस, कब्ज, अपच और एसिडिटी जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। कई बार तनाव और नींद की कमी भी पाचन से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा देती है। ऐसे में दवाओं से ज्यादा असरदार है योग। ऐसे में मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) ने स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए 10 योगासन बताए गए हैं।

नाड़ी शोधन प्राणायाम: यह सांस लेने और छोड़ने की क्रिया है। इसमें बारी-बारी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस ली और छोड़ी जाती है। इसे अनुलोम-विलोम भी कहा जाता है। इसे करने से शरीर में ऑक्सीजन बढ़ती है और तनाव कम होता है। तनाव का असर हमारे पेट और आंतों पर भी पड़ता है। ऐसे में नियमित रूप से ये आसन करने से मन शांत होता है, जिससे पाचन हार्मोन सही तरह से काम करते हैं और गैस-अपच की परेशानी दूर होती है।

ताड़ासन- इस आसन में सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाकर शरीर को ऊपर की ओर खींचा जाता है। इससे पेट, कमर और शरीर की दूसरी मांसपेशियों में खिंचाव आता है। यह आसन आंतों को रिलेक्स करता है और उनमें फंसी गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। सुबह खाली पेट इसे करने से पूरा पाचन तंत्र एक्टिव हो जाता है।

त्रिकोणासन: इस आसन में दोनों पैरों के बीच दूरी बनाकर खड़े होते हैं और एक तरफ झुककर हाथ से पैर को छूने की कोशिश करते हैं। इससे पेट और कमर के आसपास की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। यह आसन लिवर और अग्न्याशय को सक्रिय करता है, जिससे पाचक रस ज्यादा बनते हैं और खाना जल्दी पचता है।

कपालभाति: यह तेज गति से सांस छोड़ने की क्रिया है। इसमें पेट की मांसपेशियों को अंदर की ओर खींचते हुए तेजी से सांस बाहर छोड़ी जाती है। यह आंतों को अंदर से साफ करने जैसा काम करता है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और कब्ज को दूर करता है। हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी, हर्निया और पेट के अल्सर से परेशान लोग इसे करने से बचें।

वज्रासन: यह बैठकर किया जाने वाला आसान योगासन है। इसमें घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठा जाता है और रीढ़ की हड्डी सीधी रखी जाती है। यह इकलौता ऐसा आसन है जिसे खाना खाने के तुरंत बाद किया जा सकता है। इससे पैरों में खून का बहाव कम होता है और सारा खून पेट की तरफ जाता है। इसलिए खाना जल्दी पचता है और एसिडिटी नहीं बनती।

पवनमुक्तासन: यह आसन शरीर से गैस निकालने में मदद के लिए जाना जाता है। इस आसन में घुटनों को पेट से लगाने पर आंतों पर दबाव पड़ता है, जिससे रुकी हुई गैस बाहर निकलती है। जिन लोगों को बहुत गैस बनती है, उनके लिए यह सबसे अच्छा आसन है।

उष्ट्रासन: इस आसन को कैमल पोज भी कहते हैं। इसमें घुटनों के बल बैठकर शरीर को पीछे की ओर मोड़ा जाता है और हाथों से एड़ियों को पकड़ने की कोशिश की जाती है। इससे पेट के सभी अंगों में खून का संचार तेज होता है। यह अपच और पेट में भारीपन को कम करता है और भूख बढ़ाने में मदद करता है।

भुजंगासन: इसे कोबरा पोज भी कहा जाता है। इस आसन में पेट जमीन पर होता है और छाती ऊपर उठती है। इससे पेट के आसपास खिंचाव आता है। यह शरीर की अकड़न कम करने और पेट की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद करता है। यह कब्ज को दूर करने और भोजन को आंतों में आगे बढ़ाने में बहुत मददगार है।

मंडूकासन: इस आसन में वज्रासन की मुद्रा में बैठकर दोनों हाथों की मुट्ठियां बनाकर नाभि के पास रखी जाती हैं। इसके बाद सांस छोड़ते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है। इससे पेट के आसपास हल्का दबाव बनता है। यह आसन अपच, कब्ज और पेट में गैस की परेशानी कम करने में मदद करता है। कमर दर्द और पेट की सर्जरी के बाद इसे बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए।

शशांकासन: इसमें वज्रासन में बैठकर शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है और माथे को जमीन पर टिकाने की कोशिश की जाती है। इससे आंतों में जमा टॉक्सिन बाहर निकलते हैं। यह तनाव, थकान और एसिडिटी को कम करके पूरे पाचन तंत्र को शांत रखता है।

--आईएएनएस

पीके/एएस

Date & Time : 2026-10-30 13:15:05

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