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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को भाजपा ने वैश्विक संकट बताया, टीजेएस ने जनता पर 'बोझ' कहा


नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक बयानों का सिलसिला जारी है। तेलंगाना भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने कीमतों में बढ़ोतरी को पश्चिम एशिया संकट के कारण अनिवार्य बताया, तो वहीं तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) प्रमुख और विधायक एम कोदंडराम ने इसे महंगाई और आर्थिक संकट को बढ़ाने वाला कदम करार दिया।

नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक बयानों का सिलसिला जारी है। तेलंगाना भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने कीमतों में बढ़ोतरी को पश्चिम एशिया संकट के कारण अनिवार्य बताया, तो वहीं तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) प्रमुख और विधायक एम कोदंडराम ने इसे महंगाई और आर्थिक संकट को बढ़ाने वाला कदम करार दिया।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में एन रामचंद्र राव ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण पेट्रोल और डीजल की स्थिति प्रभावित होना स्वाभाविक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पर्याप्त ईंधन भंडार बनाए रखा है और फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है।

उन्होंने कहा कि जब दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों में 20 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई, तब भारत ने कीमतें नहीं बढ़ाईं बल्कि केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी भी कम की। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नाममात्र बढ़ोतरी अपरिहार्य थी। उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने के लिए कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील भी की।

वहीं, तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) प्रमुख और विधायक एम कोदंडराम ने ईंधन मूल्य वृद्धि को आर्थिक विकास के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि पिछली तीन रुपए की बढ़ोतरी के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब कीमतें नहीं बढ़ेंगी, लेकिन अब पेट्रोल-डीजल के दाम दस रुपए तक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। खाड़ी क्षेत्र की मौजूदा स्थिति के कारण लोग पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं और यदि ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ जाएंगे।

उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर आम आदमी और मध्यम वर्ग के घरेलू बजट पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ईंधन पर अत्यधिक टैक्स लगा रही है और मौजूदा संकट से निपटने के लिए टैक्स कम करना बेहतर विकल्प हो सकता है, बजाय इसके कि पूरा बोझ जनता पर डाला जाए।

उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण घरेलू कीमतों में बदलाव स्वाभाविक है, लेकिन यह बढ़ोतरी महंगाई नियंत्रण की संभावनाओं को कमजोर कर सकती है और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

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