मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने गुरुवार को कहा कि फिनटेक कंपनियां भारत के वित्तीय तंत्र की महत्वपूर्ण भागीदार हैं और वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आरबीआई का प्रयास फिनटेक कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का है, ताकि देश के हर व्यक्ति तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाई जा सकें, डिजिटल धोखाधड़ी को कम किया जा सके और बैंकिंग सेवाओं की लागत घटाई जा सके।
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मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने गुरुवार को कहा कि फिनटेक कंपनियां भारत के वित्तीय तंत्र की महत्वपूर्ण भागीदार हैं और वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आरबीआई का प्रयास फिनटेक कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का है, ताकि देश के हर व्यक्ति तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाई जा सकें, डिजिटल धोखाधड़ी को कम किया जा सके और बैंकिंग सेवाओं की लागत घटाई जा सके।
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2026 के दौरान न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वित्तीय समावेशन, ग्राहक-केंद्रित सेवाएं और सुरक्षित डिजिटल वित्तीय प्रणाली आरबीआई की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से वित्तीय सेवाओं को लोगों के गांवों और घरों तक पहुंचाना ही भविष्य की दिशा है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा, "फिनटेक हमारे लिए एक बहुत महत्वपूर्ण भागीदार है, और हमारा प्रयास है कि हम उनके साथ और अपने वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं के साथ मिलकर काम करें, ताकि पूरे भारत में हम वित्तीय समावेशन, ग्राहक-केंद्रितता और डिजिटल धोखाधड़ी को कम करने के अपने प्राथमिक उद्देश्य को प्राप्त कर सकें, साथ ही बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए लागत को भी कम कर सकें।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारा लक्ष्य इन लक्ष्यों को पूरा करने और वित्तीय प्रणाली को सभी लोगों के करीब लाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करना है-उनके गांवों और घरों तक पहुंचना है।"
इससे पहले जीएफएफ 2026 कार्यक्रम में बोलते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने बताया कि देश में वर्तमान में 57 करोड़ प्रधानमंत्री जनधन खाते, 25 करोड़ माइक्रो इंश्योरेंस पॉलिसियां और 9 करोड़ अटल पेंशन योजना लाभार्थी हैं। वहीं, यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन का पैमाना भी लगातार बढ़ रहा है और यह आज करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल इन आंकड़ों का आकार नहीं है, बल्कि यह है कि डिजिटल वित्तीय सेवाएं आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों का हिस्सा बन गई हैं। बैंकिंग अब केवल शाखाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मोबाइल फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे लोगों तक पहुंच रही है।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी ने भारत में वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। हालांकि, अगला लक्ष्य वित्तीय सेवाओं को पूरी तरह 'सर्वव्यापी और हर जगह उपलब्ध' बनाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभी भी महिलाओं, किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तक छोटे ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में चुनौतियां मौजूद हैं। पारंपरिक बैंकिंग संस्थानों के लिए इन वर्गों तक पहुंचना हमेशा आसान नहीं रहा है। ऐसे में फिनटेक कंपनियां तकनीक के जरिए इन अंतरालों को भर सकती हैं और वित्तीय समावेशन को और मजबूत बना सकती हैं।
आरबीआई गवर्नर ने फिनटेक उद्योग को चेताते हुए कहा कि तकनीक जितनी महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण विश्वास है। उन्होंने कहा कि विश्वास बनाने में वर्षों लग जाते हैं, लेकिन यह कुछ ही क्षणों में टूट सकता है।
मल्होत्रा ने कहा कि फिनटेक कंपनियों को साइबर सुरक्षा, पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ डेटा सुरक्षा और साइबर जोखिमों का प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है।
उन्होंने कहा, "ऐसी वित्तीय प्रणाली जो प्रकाश की गति से काम करती हो लेकिन लोगों का भरोसा हासिल न कर सके, उसे व्यापक स्वीकार्यता नहीं मिलेगी।"
--आईएएनएस
डीबीपी
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