नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल रूप से जोड़ा जा चुका है। इन लाभार्थियों ने मिलकर 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 9 लाख करोड़ रुपए रहा है। यह जानकारी शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
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नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल रूप से जोड़ा जा चुका है। इन लाभार्थियों ने मिलकर 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 9 लाख करोड़ रुपए रहा है। यह जानकारी शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, और उन्होंने सामूहिक रूप से 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनकी कुल राशि 8.96 लाख करोड़ रुपए रही। लाभार्थियों को डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन और ब्याज सब्सिडी के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपए भी प्राप्त हुए हैं।
इसके अलावा, योजना की मजबूत उपलब्धियों और इसके स्पष्ट प्रभाव को देखते हुए इसे मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है।
पीएम स्वनिधि योजना जून 2020 में शुरू की गई थी। यह देश की पहली ऐसी सूक्ष्म ऋण योजना है, जो रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं पर केंद्रित है और जिसमें सरकार समर्थित ऋण गारंटी की सुविधा दी जाती है।
यह योजना अब देशव्यापी अभियान का रूप ले चुकी है, जो भारत की असंगठित अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लाखों लोगों को वित्तीय सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रही है।
बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराने के अलावा, इस योजना ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है, संस्थागत ऋण तक पहुंच आसान बनाई है और सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार किया है।
इस योजना ने पूरे देश में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के व्यवसाय को अधिक टिकाऊ बनाया है और उनकी आय में सुधार किया है। पीएम स्वनिधि योजना के तहत लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों ने पहली बार औपचारिक संस्थागत ऋण प्राप्त किया।
इसके अलावा, लाभार्थियों की आय में औसतन लगभग 20 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। योजना से हुए आर्थिक लाभों ने लाभार्थियों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है।
इस योजना ने बेहतर आवास सुविधा, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक पहुंच को भी मजबूत किया है।
इसने शहरी क्षेत्रों के कमजोर और वंचित समुदायों के सामाजिक समावेशन को बढ़ावा दिया है। योजना के लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जबकि करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित समुदायों से आते हैं।
यह योजना 15,000 रुपए, 25,000 रुपए और 50,000 रुपए की तीन चरणों वाली बिना गारंटी की कार्यशील पूंजी ऋण सुविधा प्रदान करती है, जिसमें ब्याज सब्सिडी और ऋण गारंटी सहायता भी शामिल है।
जो विक्रेता दूसरे चरण का ऋण सफलतापूर्वक चुका देते हैं, वे 30,000 रुपए तक की सीमा वाले यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड के लिए पात्र हो जाते हैं।
डिजिटल भुगतान और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को खुदरा और थोक डिजिटल लेनदेन पर 1,600 रुपए तक का कैशबैक प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाता है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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