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पीरियड्स से जुड़े मुद्दों को कलंकमुक्त करने की जरूरत: राघव चड्ढा

नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने शुक्रवार को सदन में मासिक धर्म (पीरियड्स) से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि अगर देश की 35 करोड़ महिलाएं और लड़कियां मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में बिना शर्म और डर के बात नहीं कर सकतीं, तो हम खुद को सच में प्रगतिशील नहीं कह सकते।

नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने शुक्रवार को सदन में मासिक धर्म (पीरियड्स) से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि अगर देश की 35 करोड़ महिलाएं और लड़कियां मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में बिना शर्म और डर के बात नहीं कर सकतीं, तो हम खुद को सच में प्रगतिशील नहीं कह सकते।

राज्यसभा में बोलते हुए चड्ढा ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता कोई दान या एहसान नहीं है, न ही यह कोई छोटा मुद्दा है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा और समानता से जुड़ा विषय है और सबसे बढ़कर यह महिलाओं की गरिमा का सवाल है।

उन्होंने कहा, “अगर किसी लड़की को स्कूल इसलिए छोड़ना पड़ता है क्योंकि वहां सैनिटरी पैड, पानी या निजता की व्यवस्था नहीं है, तो यह उसकी व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि हमारी सामूहिक विफलता है।”

राघव चड्ढा ने समाज में मौजूद दोहरे मानदंडों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “हम ऐसे देश में रहते हैं जहां शराब और सिगरेट खुलेआम बिकती हैं, लेकिन सैनिटरी पैड आज भी अखबार में लपेटकर दिए जाते हैं, मानो उन्हें छिपाना जरूरी हो। कहीं न कहीं समाज ने एक जैविक तथ्य को सामाजिक वर्जना बना दिया है। विज्ञान से जुड़े मुद्दे को चुप्पी का विषय बना दिया गया है।”

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि भारत में 35 करोड़ से अधिक महिलाएं और लड़कियां इससे प्रभावित हैं। किसी भी देश की प्रगति की असली कसौटी यही है कि हर लड़की बिना किसी शर्म या डर के स्कूल जा सके, सम्मान के साथ जीवन जी सके और इस विषय पर खुलकर बात कर सके।

इस बीच सरकार ने भी मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों में 15 से 24 वर्ष की महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान स्वच्छ तरीकों के इस्तेमाल का प्रतिशत 57.6 प्रतिशत से बढ़कर 77.3 प्रतिशत हो गया है।

वहीं रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत चल रही प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के जरिए देशभर में 16,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र खोले गए हैं, जहां ‘सुविधा’ नाम से ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन सिर्फ एक रुपये प्रति पैड की दर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 30 नवंबर 2025 तक ‘सुविधा’ सैनिटरी नैपकिन की 96.30 करोड़ से अधिक बिक्री हो चुकी है। ये पैड पर्यावरण के अनुकूल हैं और ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बने हैं।

इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय किशोरियों (10 से 19 वर्ष) में मासिक धर्म स्वच्छता सुधारने के लिए मेनस्ट्रुअल हाइजीन प्रमोशन योजना भी चला रहा है। इस योजना के तहत जागरूकता बढ़ाने, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सुरक्षित व पर्यावरण अनुकूल निस्तारण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार ने स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मेनस्ट्रुअल हाइजीन नीति भी तैयार की है, जिसके तहत स्कूलों में सस्ती स्वच्छता उत्पादों की उपलब्धता, अलग शौचालय, सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था और पाठ्यक्रम में इस विषय को शामिल करने पर जोर दिया गया है।

वहीं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत भी मासिक धर्म स्वच्छता और सैनिटरी नैपकिन के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

--आईएएनएस

डीएससी

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