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बेंगलुरु. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बेंगलुरु में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला और देश की बदलती राजनीतिक दिशा का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि आज बेंगलुरु की धरती पर उमड़ा जनसैलाब गवाही दे रहा है कि दक्षिण में भी 'भगवा सूरज' पूरी चमक के साथ उदय हो चुका है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत 10 मई के ऐतिहासिक महत्व से की। उन्होंने याद दिलाया कि 1857 में आज ही के दिन स्वतंत्रता संग्राम की पहली चिंगारी फूटी थी। पीएम ने कहा:
"साहस और शक्ति की विरासत ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। तीन दिन पहले हमने 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ मनाई, जो हमारे राष्ट्र के संकल्प का प्रतीक है।"
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सोमवार (11 मई) को वे गुजरात के सोमनाथ में मंदिर पुनर्निर्माण उत्सव में शामिल होंगे।
पीएम मोदी ने हालिया चुनावी सफलताओं का जिक्र करते हुए कहा कि पुडुचेरी, असम और विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के परिणाम भारत की नई राजनीतिक दिशा तय कर रहे हैं।
बंगाल में ऐतिहासिक परिवर्तन: पीएम ने कहा कि 10 साल पहले जहां भाजपा के केवल 3 विधायक थे, आज वहां 200 से अधिक विधायकों के साथ भाजपा की सरकार जनता की सेवा कर रही है।
दक्षिण में विस्तार: केरल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा की संख्या 1 से 3 पहुंच गई है और वह दिन दूर नहीं जब वहां एनडीए पूर्ण बहुमत प्राप्त करेगा।
जनता का मूड: प्रधानमंत्री के अनुसार, दुनिया के कई देशों में अस्थिरता है, लेकिन भारत की जनता ने 'स्थिरता' को चुना है। जनता अब 'स्पीड' चाहती है, 'स्कैम' (घोटाले) नहीं बल्कि 'समाधान' चाहती है।
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जो पार्टी 40 साल पहले 400 से अधिक सीटें जीतती थी, वह पिछले तीन चुनावों से 100 का आंकड़ा भी नहीं छू पा रही है। उन्होंने कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा:
संस्थानों के प्रति घृणा: हार की हताशा में कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान, कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को दोष दे रही है।
एजेंडा विहीन राजनीति: कांग्रेस के पास अब केवल 'गाली-गलौच' और 'भद्दी भाषा' का एजेंडा बचा है।
विकास का मॉडल: पीएम ने तंज कसा कि कांग्रेस की कोई भी राज्य सरकार दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाती, जबकि भाजपा को जनता बार-बार अवसर देती है क्योंकि हमारा मंत्र 'सबका साथ-सबका विकास' है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आज पूरा देश भाजपा की 'राष्ट्र नीति' के साथ चल रहा है। गुड गवर्नेंस (सुशासन) ही वह मॉडल है जिसे भारत के नौजवान, महिलाएं और किसान पसंद कर रहे हैं। बेंगलुरु की यह सभा दक्षिण भारत में भाजपा के बढ़ते प्रभाव और 2026 की राजनीतिक जमीन को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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