
मैहर। मध्यप्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन और अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई के दौरान पुलिस पर हमले की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। देवास जिले में थाना प्रभारी दिलीप पुरी की शहादत के बाद एक बार फिर सवाल उठा है कि आखिर कार्रवाई का सीधा अधिकार खनिज और आबकारी विभाग के पास होने के बावजूद जान क्यों पुलिस की जा रही है।
नियम क्या है और हो क्या रहा है?
नियमानुसार प्रदेश में अवैध/वैध खनिज के उत्खनन, भंडारण, परिवहन तथा शराब, ड्रग्स के निर्माण, भंडारण और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई का प्रत्यक्ष अधिकार खनिज विभाग, आबकारी विभाग और नारकोटिक्स विभाग के पास है। इन विभागों के मांग पत्र पर और उनके अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस बल सहयोग करता है।
लेकिन हकीकत में अक्सर जिम्मेदार विभाग पुलिस के कंधे पर बंदूक रखकर काम करते हैं। कार्रवाई की जिम्मेदारी उनकी, लेकिन मैदान में अकेली पुलिस भेज दी जाती है। इसी कारण पुलिसकर्मियों को माफिया के हमले का सामना करना पड़ता है और कभी-कभी जान के लाले पड़ जाते हैं।
कम्पोजिट शराब की आड़ में अवैध कारोबार
सूत्रों के अनुसार प्रदेश में कम्पोजिट सरकारी मदिरा दुकानों की आड़ में सादी, देशी, मसाला, प्लेन, गोवा और अंग्रेजी शराब की बड़े पैमाने पर अवैध बिक्री की जा रही है। शराब और ड्रग्स माफिया बेलगाम हो चुके हैं।
रामनगर से रहा है नाता
शहीद हुए थाना प्रभारी दिलीप पुरी रामनगर थाने में टीआई के रूप में भी सेवारत रह चुके हैं। उनके कार्यकाल को आज भी लोग ईमानदार और सेवाभावी के रूप में याद करते हैं। उनकी शहादत की खबर से रामनगर क्षेत्र में शोक की लहर है। जानने वालों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर शोक संवेदना व्यक्त की है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर विधायिका, कार्यपालिका और विभागों के बीच सामंजस्य की कमी को उजागर किया है। लोगों का कहना है कि जब तक खनिज और आबकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से नहीं निभाएंगे, तब तक पुलिस जवान इसी तरह अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे।
पुलिस और सैन्य शक्ति का उपयोग राष्ट्र की गरिमा बचाने के लिए होना चाहिए, न कि विभागीय लापरवाही की कीमत चुकाने के लिए।
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