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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं, मरीज देखने का भी काम कर रहे फार्मासिस्ट

बसंती, 9 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के बसंती ब्लॉक स्वास्थ्य विभाग की हालत काफी खराब है। यहां के महेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो चुकी हैं। सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी से भी यह केंद्र जूझ रहा है।

बसंती, 9 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के बसंती ब्लॉक स्वास्थ्य विभाग की हालत काफी खराब है। यहां के महेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो चुकी हैं। सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि पर्याप्त बुनियादी ढांचे की कमी से भी यह केंद्र जूझ रहा है।

भरतगढ़ ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला यह महेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक तरफ जर्जर और बदहाल स्थिति में है, वहीं यहां की चिकित्सा व्यवस्था भी काफी खराब है। डॉक्टर, नर्स से लेकर ग्रुप-डी कर्मचारियों तक सभी के नाम कागजों में दर्ज हैं, लेकिन अस्पताल में वास्तव में किसी की मौजूदगी शायद ही देखने को मिलती है। अस्पताल में एक डॉक्टर तैनात होने के बावजूद व्यवहारिक रूप से उनकी उपस्थिति नहीं होती। डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी भी नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते। केवल एक फार्मासिस्ट ही रोजाना अस्पताल पहुंचते हैं।

सौरभ जाना नाम के इस फार्मासिस्ट ही मरीजों को देखते हैं और उन्हें आवश्यक दवाइयां भी देते हैं।

बसंती के भरतगढ़ ग्राम पंचायत और बसंती ग्राम पंचायत के हजारों लोगों के लिए यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही मुख्य सहारा है। दस बेड वाला यह अस्पताल फिलहाल केवल आउटडोर सेवा तक ही सीमित रह गया है। आउटडोर विभाग भी केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। वही मरीजों की जांच करते हैं और जरूरत के अनुसार दवाइयां देते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल से मुख्य रूप से बुखार, सिरदर्द, ब्लड प्रेशर और शुगर की दवाइयां ही मिलती हैं। इससे ज्यादा गंभीर समस्या होने पर मरीजों को लगभग 12 किलोमीटर दूर बसंती ब्लॉक ग्रामीण अस्पताल या फिर 30 किलोमीटर दूर कैनिंग महकमा अस्पताल जाना पड़ता है।

हालांकि फार्मासिस्ट का दावा है कि मेडिकल ऑफिसर कभी-कभी अस्पताल आते हैं। इसके अलावा वे मुख्य रूप से पुराने प्रिस्क्रिप्शन देखकर ही दवाइयां देते हैं और किसी प्रकार की एंटीबायोटिक दवा नहीं देते।

फिलहाल अस्पताल की स्थिति लगभग जर्जर हो चुकी है। चारों तरफ से प्लास्टर झड़ रहा है, कमरों के अंदर दीवारों और छत पर बड़े-बड़े पौधे उग आए हैं। कई बार छत के हिस्से टूटकर गिर रहे हैं। इस समय अस्पताल का केवल एक कमरा किसी तरह उपयोग में लाया जा रहा है, जहां आउटडोर विभाग के मरीजों को देखा जाता है। लेकिन उस कमरे में भी कई जगहों से छत के टुकड़े गिर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इस अस्पताल में कई और विभाग भी चलते थे। लेकिन सेवाएं बेहतर होने के बजाय और खराब होती चली गईं। अस्पताल की इमारत की मरम्मत और स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए स्थानीय लोगों ने कई बार आंदोलन भी किया, लेकिन उनका आरोप है कि इससे कोई फायदा नहीं हुआ। उल्टा अस्पताल में पीने के पानी की भी समस्या है, ऐसा दावा फार्मासिस्ट ने किया है।

हालांकि बसंती के विधायक श्यामल मंडल ने अस्पताल की इस बदहाल स्थिति के आरोपों को मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर जिला स्वास्थ्य अधिकारी को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे।

वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ दल पर तंज कसने का मौका नहीं छोड़ा।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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