
चंडीगढ़/नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी और उसके कभी 'पोस्टर बॉय' रहे राघव चड्ढा के बीच की दूरियां अब सार्वजनिक टकराव में बदल चुकी हैं. पंजाब की AAP सरकार ने सांसद राघव चड्ढा को दी गई Z+ सुरक्षा वापस ले ली है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पार्टी ने हाल ही में उन्हें राज्यसभा में 'डिप्टी लीडर' के पद से भी हटा दिया था.
सौरभ भारद्वाज का बड़ा दावा
AAP के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया (X) पर दावा किया है कि राघव चड्ढा अब केंद्र सरकार के संरक्षण में हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा:
"सांसद हमारी पार्टी का है, फिर केंद्र सरकार उन पर इतनी मेहरबान क्यों है कि उन्हें Z+ सुरक्षा दी जा रही है?"
हालांकि, चड्ढा के करीबी सूत्रों का कहना है कि अभी उन्हें केंद्र से औपचारिक सुरक्षा नहीं मिली है, लेकिन अस्थायी तौर पर दिल्ली पुलिस उनकी सुरक्षा का जिम्मा संभाल सकती है.
बढ़ती तल्खी के मुख्य कारण
पार्टी और चड्ढा के बीच विवाद के कई गहरे कारण बताए जा रहे हैं:
अनुशासनात्मक कार्रवाई: पंजाब के सीएम भगवंत मान ने हाल ही में चड्ढा को "कॉम्प्रोमाइज्ड" (समझौतावादी) करार दिया था. आरोप है कि उन्होंने संसद में पार्टी लाइन से हटकर रुख अपनाया.
पद से हटाना: दो हफ्ते पहले चड्ढा को हटाकर अशोक मित्तल को राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया गया. पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को यहाँ तक लिख दिया कि चड्ढा को पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए.
बीजेपी से नजदीकी के आरोप: सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि चड्ढा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से बीजेपी विरोधी पोस्ट हटा दिए हैं, जिससे उनके भविष्य के राजनीतिक कदमों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.
राजनीतिक गलियारों में हलचल
विशेषज्ञों का मानना है कि राघव चड्ढा की सुरक्षा हटाना और उनके पर कतरना इस बात का संकेत है कि AAP नेतृत्व अब उन्हें पूरी तरह किनारे करने का मन बना चुका है. दूसरी ओर, केंद्र द्वारा सुरक्षा मिलने की संभावना ने इन चर्चाओं को बल दे दिया है कि क्या चड्ढा किसी नए राजनीतिक सफर की तैयारी में हैं.
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