जयपुर, 28 मई (आईएएनएस)। नारायण का अत्यंत प्रिय पवित्र पुरुषोत्तम मास चल रहा है। सनातन धर्म में इस महीने को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान नारायण और उनके विभिन्न रूपों के दर्शन, पूजन, दान और पुण्य का खास महत्त्व है। ऐसे में देशभर के नारायण से जुड़े प्रमुख मंदिरों की श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं जयपुर के प्रसिद्ध एक ऐसे मंदिर की, जो ‘वृंदावन ठाकुर’ के सात प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह मंदिर न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी भव्य वास्तुकला, शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटकों का भी पसंदीदा है।
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जयपुर, 28 मई (आईएएनएस)। नारायण का अत्यंत प्रिय पवित्र पुरुषोत्तम मास चल रहा है। सनातन धर्म में इस महीने को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान नारायण और उनके विभिन्न रूपों के दर्शन, पूजन, दान और पुण्य का खास महत्त्व है। ऐसे में देशभर के नारायण से जुड़े प्रमुख मंदिरों की श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं जयपुर के प्रसिद्ध एक ऐसे मंदिर की, जो ‘वृंदावन ठाकुर’ के सात प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह मंदिर न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी भव्य वास्तुकला, शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटकों का भी पसंदीदा है।
गोविंद देव जी मंदिर जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में बादल महल और चंद्र महल के बीच स्थित है। साल 1735 में आमेर के कछवाहा राजवंश के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। यहां मुख्य देवता भगवान श्रीकृष्ण का गोविंद रूप है, जो कछवाहा राजवंश के कुल देवता भी माने जाते हैं।
सबसे खास बात यह है कि गोविंद देव जी की रंगीन प्रतिमा को ‘बज्रकृत’ कहा जाता है। मान्यता है कि इस प्रतिमा का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने मात्र 13 वर्ष की आयु में अपनी दादी के निर्देश पर किया था। राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने इस पवित्र प्रतिमा को वृंदावन से जयपुर लाकर स्थापित किया। इस रहस्यमयी और पवित्र प्रतिमा के कारण मंदिर की ख्याति पूरे देश में फैली हुई है।
पुरुषोत्तम मास, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, और अनंत चतुर्दशी के साथ ही पूर्णिमा व आम दिनों के साथ ही विशेष तिथि पर इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। प्रतिदिन यहां 7 बार पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया जाता है। बड़ी संख्या में भक्त दूर-दूर से गोविंद देव जी के दर्शन के लिए आते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर तो मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। इस दिन विशेष सजावट, भजन-कीर्तन, और उत्सव के साथ भगवान के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है।
मंदिर के चारों ओर सुंदर बगीचे हैं और शांत वातावरण है। यह मंदिर न केवल अध्यात्म बल्कि पर्यटन के हिसाब से भी शानदार है। यहां आकर भक्त न सिर्फ आध्यात्मिक शांति पाते हैं बल्कि मन को नई ऊर्जा भी मिलती है। गोविंद देव जी मंदिर वास्तुकला के शानदार नमूने के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर की छत सोने की परत से ढकी हुई है, जो इसे भव्य और चमकदार बनाती है। अंदर सुंदर नक्काशीदार झाड़फानूस लगे हैं। दीवारों पर भारतीय कला को पेश करते हुए खूबसूरत चित्र और भित्तिचित्र बने हुए हैं। मंदिर की बारीक नक्काशी और राजसी डिजाइन पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
जयपुर घूमने आने वाले पर्यटक सिटी पैलेस के साथ-साथ इस मंदिर जरूर आते हैं। यहां का शांत और पवित्र माहौल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देता है। गोविंद देव जी मंदिर ‘वृंदावन ठाकुर’ के सात प्रमुख मंदिरों में शामिल है, जिसमें श्री राधा वल्लभ जी, श्री बांके बिहारी जी जैसे अन्य प्रसिद्ध मंदिर भी आते हैं। यह मंदिर भक्ति, इतिहास, कला और वास्तुकला का अद्भुत संगम है। पुरुषोत्तम मास के इस पावन अवसर पर गोविंद देव जी मंदिर में दर्शन कर भक्त विशेष पुण्य प्राप्त करते हैं।
गोविंद देवजी मंदिर जयपुर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, और यहां पहुंचना काफी आसान है। कार से आने वाले श्रद्धालु एलिवेटेड अजमेर रोड या जयपुर रोड के जरिए मंदिर तक पहुंच सकते हैं। वहीं, बस से यात्री सिंधी कैंप बस स्टैंड तक पहुंच सकते हैं, जो मंदिर से करीब 4 किलोमीटर दूर स्थित है। वहां से टैक्सी या ऑटो के जरिए कुछ ही मिनटों में मंदिर पहुंचा जा सकता है। ट्रेन से आने वाले यात्रियों के लिए जयपुर जंक्शन सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर दूर है।
--आईएएनएस
एमटी/डीकेपी
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