
नई दिल्ली. भारतीय रेलवे से अपने उत्पाद और माल भेजने वाले व्यापारियों, कारोबारियों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। रेलवे बोर्ड ने पार्सल वैन की बुकिंग को लेकर नियमों में बड़ा और सख्त बदलाव करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब पार्सल वैन बुक कराने के लिए कारोबारियों को पहले के मुकाबले पांच गुना अधिक जमानत राशि (Security Deposit) चुकानी होगी। इसके साथ ही, समय पर माल न चढ़ाने या तय नियमों का उल्लंघन करने पर पूरी राशि जब्त करने का भी प्रावधान किया गया है।
रेलवे बोर्ड के मुताबिक, इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य पार्सल वैनों की होने वाली फर्जी बुकिंग और कुछ बड़े कारोबारियों द्वारा अनावश्यक रूप से वैन पर कब्जा जमाने की प्रवृत्ति को रोकना है। अक्सर देखा जाता था कि लोग वैन बुक करा लेते थे लेकिन समय पर माल लोड नहीं करते थे, जिससे रेलवे को वित्तीय नुकसान होता था और जरूरतमंद व्यापारियों को समय पर वैन नहीं मिल पाती थी। नए नियमों से इस धांधली पर रोक लगेगी और वास्तविक व्यापारियों को समय पर पार्सल वैन की सुविधा मिल सकेगी।
रेलवे बोर्ड द्वारा सभी रेलवे जोन को जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, स्टेशनों को पार्सल की मांग के आधार पर दो भागों में बांटा गया है:
नोटिफाइड स्टेशन (Notified Stations): जिन रेलवे स्टेशनों पर पार्सल वैन की बुकिंग की मांग बहुत अधिक रहती है, उन्हें 'नोटिफाइड स्टेशन' घोषित किया जाएगा। इन स्टेशनों से पार्सल वैन बुक कराने पर अब 25,000 रुपये की जमानत राशि देनी होगी (जो पहले मात्र 5,000 रुपये थी)।
गैर-नोटिफाइड स्टेशन (Non-Notified Stations): जो स्टेशन इस विशेष श्रेणी में नहीं आते हैं, उनके लिए यह जमानत राशि बढ़ाकर 10,000 रुपये तय की गई है।
अग्रिम बुकिंग: व्यापारी अब माल लोड करने की निर्धारित तिथि से अधिकतम 90 दिन पहले तक पार्सल वैन की एडवांस बुकिंग करा सकेंगे।
लॉक-इन अवधि (Lock-in Period): बुकिंग कराने के बाद निर्धारित तिथि से पहले के 10 दिनों की अवधि को 'लॉक-इन पीरियड' माना जाएगा। यदि कोई व्यापारी इस लॉक-इन अवधि के दौरान अपनी बुकिंग रद्द (Cancel) कराता है, तो उसकी पूरी जमानत राशि जब्त कर ली जाएगी।
रेलवे की विफलता पर रिफंड: यदि रेलवे बुकिंग की तय तिथि से अगले 10 दिनों तक व्यापारी को पार्सल वैन उपलब्ध कराने में विफल रहता है, और व्यापारी इस वजह से अपनी बुकिंग कैंसिल करता है, तो उसे पूरी रकम वापस (Full Refund) मिल जाएगी।
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि पार्सल वैन का आवंटन पूरी तरह से 'पहले आओ, पहले पाओ' (First Come, First Served) की तर्ज पर पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। जिस कारोबारी ने पहले आवेदन और भुगतान किया है, उसे प्राथमिकता मिलेगी।
इसके अतिरिक्त, यदि पार्सल वैन प्लेटफॉर्म या यार्ड में लगने के बाद व्यापारी ने तय समय सीमा के भीतर सामान चढ़ाना (Loading) शुरू नहीं किया, तो भी उसकी सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं होगी। साथ ही, वैन को तय समय से अधिक देर तक रोकने के लिए रेलवे द्वारा अतिरिक्त विलंब शुल्क (Demurrage/Wharfage Charge) भी वसूला जाएगा।
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