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राजनाथ सिंह की वियतनाम और दक्षिण कोरिया की यात्रा, रक्षा साझेदारी पर होगी वार्ता


नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचेंगे। इसके बाद वह दक्षिण कोरिया का भी दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करना है।

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचेंगे। इसके बाद वह दक्षिण कोरिया का भी दौरा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करना है।

रक्षा मंत्री ने रवाना होने से पहले बताया कि वह वियतनाम और दक्षिण कोरिया के साथ भारत की साझेदारी के दायरे को और विस्तृत करने पर ध्यान देंगे। उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान रणनीतिक सैन्य सहयोग को गहरा करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को मजबूत बनाने और समुद्री सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा, ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके।

माना जा रहा है कि वियतनाम दौरे में भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग सबसे बड़ा एजेंडा रहेगा। खास तौर पर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सौदे पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि यह डील उन्नत चरण में पहुंच चुकी है और इसकी अनुमानित कीमत करीब 5,800 करोड़ रुपए हो सकती है। यदि यह समझौता होता है तो फिलीपींस के बाद वियतनाम भी ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली हासिल करने वाला बड़ा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश बन जाएगा। भारत और वियतनाम के बीच समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक सहयोग और रक्षा उपकरणों के रखरखाव पर भी बातचीत हो सकती है।

वहीं भारत, वियतनाम के सुखोई-30 लड़ाकू विमानों और किलो-क्लास पनडुब्बियों के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सहायता देने पर भी विचार कर रहा है।

उधर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान रक्षा निर्माण, तकनीकी हस्तांतरण और नई सैन्य तकनीकों पर सहयोग प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों देशों के बीच पहले से के-9 वज्र तोप प्रणाली पर सहयोग चल रहा है और अब अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों, एयर डिफेंस सिस्टम और रक्षा स्टार्टअप सहयोग को बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच ‘कोरिया-इंडिया डिफेंस एक्सेलेरेटर’ पहल को भी आगे बढ़ाया जा सकता है। इसका उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप्स, रिसर्च संस्थानों और निवेशकों को एक साझा मंच देना है ताकि उन्नत सैन्य तकनीकों का संयुक्त विकास किया जा सके।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह विदेश दौरे भारत की एक्ट ईस्ट नीति और फ्री, ओपन एंड रूल्स-बेस्ड इंडो-पैसिफिक रणनीति को नई मजबूती देने वाले माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार चीन के बढ़ते प्रभाव और दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच भारत, वियतनाम और दक्षिण कोरिया जैसे साझेदार देशों के साथ सामरिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

--आईएएनएस

जीसीबी/एसके

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