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राजनाथ सिंह ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को भैरों सिंह शेखावत की सोच से जोड़ा


जयपुर, 14 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा की शुरुआती जड़ें पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत की सोच में थीं, जिनका मानना ​​था कि एक साथ चुनाव कराने से समय और संसाधनों की बचत होगी, और साथ ही विकास कार्यों में निरंतरता भी बनी रहेगी।

जयपुर, 14 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा की शुरुआती जड़ें पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत की सोच में थीं, जिनका मानना ​​था कि एक साथ चुनाव कराने से समय और संसाधनों की बचत होगी, और साथ ही विकास कार्यों में निरंतरता भी बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के तहत यह विचार अब राष्ट्रीय बहस का एक अहम मुद्दा बन गया है।

भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में शेखावत के योगदान को याद करते हुए, उन्होंने आपातकाल के दौरान उनकी अटूट प्रतिबद्धता और राज्यसभा के सभापति के तौर पर नई संसदीय परम्पराएं स्थापित करने में उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

रक्षा मंत्री गुरुवार को जोधपुर में दिवंगत भैरों सिंह शेखावत की प्रतिमा के अनावरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि शेखावत ने राजनीति में हमेशा ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिकता को प्राथमिकता दी। एक साधारण किसान परिवार से उठकर भारत के उपराष्ट्रपति बनने तक का उनका जीवन सफर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

उन्होंने आगे कहा कि शेखावत के मूल्य, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण समाज और राजनीतिक जीवन, दोनों को ही आगे भी राह दिखाते रहेंगे।

राजनाथ सिंह ने कहा कि दिवंगत पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसेवा की राजनीति के जीवंत प्रतीक थे।

उन्होंने कहा कि शेखावत ने राजस्थान के हर घर में समृद्धि, हर हाथ को काम और हर नागरिक के लिए सम्मान का सपना देखा था।

उन्होंने आगे कहा कि आज भारत और राजस्थान, दोनों ही तेजी से विकास कर रहे हैं, वहीं पूरी दुनिया पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत के बढ़ते वैश्विक कद को पहचान रही है।

सिंह ने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के विचार की वैचारिक जड़ें शेखावत की सोच में ही थीं, क्योंकि उनका मानना ​​था कि एक साथ चुनाव कराने से समय और संसाधनों की बचत होगी, साथ ही विकास कार्यों में निरंतरता भी बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के तहत यह विचार अब राष्ट्रीय बहस का एक अहम मुद्दा बन गया है।

उन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र के प्रति शेखावत की अटूट प्रतिबद्धता और राज्यसभा के सभापति के तौर पर नई संसदीय परंपराएं स्थापित करने में उनके योगदान को भी याद किया।

उनके शासन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि शेखावत के 'अंत्योदय' दृष्टिकोण का उद्देश्य समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति का उत्थान करना था, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा गांवों तक पहुंचकर और जमीनी स्तर पर विकास को मजबूत करके उसी भावना को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री को एक सफल और प्रभावशाली नेता के तौर पर याद किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि राजस्थान में ग्रामीण जल आपूर्ति में काफी विस्तार हुआ है; 2019 में जहां लगभग 11.68 लाख घरों तक पानी पहुंचता था, वहीं मार्च 2025 तक यह संख्या बढ़कर 60 लाख से ज्यादा घरों तक पहुंच जाएगी।

सिंह ने यह भी कहा कि भैरों सिंह शेखावत और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मिलकर लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद-आधारित राजनीति और शासन की नैतिकता को मजबूत किया।

1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान ने एक बार फिर भारत की रणनीतिक ताकत को दुनिया के सामने रखने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शेखावत लोकतांत्रिक मर्यादाओं के रक्षक, गरीबों की आवाज और नैतिक राजनीति के प्रतीक थे।

उन्होंने कहा कि शेखावत ने किसानों, मजदूरों और समाज के सबसे वंचित तबकों के लिए लगातार काम किया, और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 'अंत्योदय' के दर्शन को जमीनी हकीकत में बदला।

उन्होंने आगे कहा कि शेखावत ने प्रशासनिक सुधारों, वित्तीय अनुशासन, जल संरक्षण, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक फैसले लिए।

उन्होंने कहा कि शेखावत हमेशा यह मानते थे कि राजनीति सिर्फ शासन-प्रशासन तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे समाज के सबसे आखिरी व्यक्ति तक गरिमा और उम्मीद पहुंचानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक किसान परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों तक पहुंचना, शेखावत की ईमानदारी, समर्पण और सादगी को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि शेखावत, जिन्हें प्यार से 'धरती पुत्र' कहा जाता था, ग्रामीण जीवन से हमेशा गहराई से जुड़े रहे; अपनी जमीन से जुड़ी शख्सियत और जनसेवा की भावना के जरिए उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित किया।

--आईएएनएस

एससीएच

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