
राजस्थान के बालोतरा जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहाँ पचपदरा स्थित देश की पहली ग्रीनफ़ील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन करने से महज 24 घंटे पहले हुई। चश्मदीदों के अनुसार, आग लगने के बाद रिफाइनरी परिसर से धुएं के काले और घने बादल आसमान में छा गए, जिसे कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें सुरक्षा इंतजामों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, आग रिफाइनरी के मुख्य 'सीड्यू सेक्शन' (Crude Distillation Unit) में लगी थी। राहत की बात यह है कि इस घटना में अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली है। दमकल विभाग की गाड़ियों ने मौके पर पहुँचकर आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू की, लेकिन उद्घाटन से ठीक पहले हुई इस घटना ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। लोग अब इसे अधिकारियों की बड़ी लापरवाही मान रहे हैं।
पचपदरा रिफाइनरी से भारत को कई बड़ी उम्मीदें हैं। यह हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार का एक संयुक्त उद्यम है। इस रिफाइनरी का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और घरेलू उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए ऊर्जा उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बनने जा रही है। इस परियोजना के शुरू होने से हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलने की भी संभावना है।
इस रिफाइनरी का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसकी आधारशिला सबसे पहले 22 सितंबर 2013 को तत्कालीन यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत सरकार के दौरान रखी थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत 37,230 करोड़ रुपये थी। हालांकि, केंद्र और राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद परियोजना की लागत और शर्तों को लेकर लंबे समय तक मंथन चला। अंततः 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रोजेक्ट को नए सिरे से शुरू किया और इसकी संशोधित लागत 43,129 करोड़ रुपये तय की गई। अब जब यह पूरी तरह तैयार होकर राष्ट्र को समर्पित होने वाली थी, तभी यह हादसा हो गया।
ईंधन उत्पादन के अलावा, इस रिफाइनरी से बड़ी मात्रा में डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन की भी उम्मीद है। यहाँ बनने वाले पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीइथाइलीन, बेंजीन और ब्यूटाडीन जैसे उत्पाद क्षेत्र की अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल का काम करेंगे। इससे प्लास्टिक फर्नीचर, ऑटोमोबाइल पुर्जे, चिकित्सा उपकरण और पैकेजिंग फिल्मों जैसे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इस एकीकृत विकास से राजस्थान न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा। वर्तमान में प्रशासन इस बात की गहन जांच कर रहा है कि आग लगने का वास्तविक कारण तकनीकी खराबी थी या सुरक्षा मानकों की अनदेखी।
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