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रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुंड से बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार, दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु


उज्जैन, 9 जून (आईएएनएस)। श्री महाकालेश्वर मंदिर में पुरूषोत्तम मास के नवमी तिथि, मंगलवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। भगवान महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड लगा कर भव्य शृंगार किया गया।

उज्जैन, 9 जून (आईएएनएस)। श्री महाकालेश्वर मंदिर में पुरूषोत्तम मास के नवमी तिथि, मंगलवार को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। भगवान महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड लगा कर भव्य शृंगार किया गया।

सुबह चार बजे बाबा महाकाल के पट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, "जय श्री महाकाल" के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।

मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल को रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड लगाकर राजा स्वरूप में शृंगार किया गया।

मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही कतारबद्ध थे।

पौ फटने से पहले, परंपरा अनुसार भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले जाते हैं। बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' रूप में परिवर्तन का दार्शनिक महत्व है। यह उस दिव्य अवस्था को दर्शाता है, जहां अनंत, रूपहीन और सर्वव्यापी शिव, भक्तों के कल्याण के लिए एक पूजनीय स्वरूप में प्रकट होते हैं।

--आईएएनएस

एसडी/एएस

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