अयोध्या, 19 जून (आईएएनएस)। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किए जाने के फैसले का अयोध्या के संत समाज ने स्वागत किया है। संतों का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की अफवाहों और भ्रम फैलाने से बचना चाहिए तथा जिसके पास भी कोई साक्ष्य हो, वह जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए। संत वरुण दास महाराज ने इस मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी शामिल करने की मांग की।
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अयोध्या, 19 जून (आईएएनएस)। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किए जाने के फैसले का अयोध्या के संत समाज ने स्वागत किया है। संतों का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की अफवाहों और भ्रम फैलाने से बचना चाहिए तथा जिसके पास भी कोई साक्ष्य हो, वह जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए। संत वरुण दास महाराज ने इस मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी शामिल करने की मांग की।
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी का गठन किया है। उन्होंने कहा, "मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल से धन्यवाद करता हूं। उन्होंने एसआईटी गठित की है और कहा है कि हमें 15 दिन इंतजार करना चाहिए। सभी पक्षों को बिना किसी हस्तक्षेप के जांच प्रक्रिया पूरी होने देनी चाहिए। यदि किसी के पास कोई भी प्रमाण या साक्ष्य हैं तो उन्हें एसआईटी को सौंप देना चाहिए।"
महंत सीताराम दास ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले भ्रम फैलाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राम मंदिर और सनातन परंपराओं को लेकर पहले भी सवाल उठाते रहे हैं और अब इस मामले को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग पहले राम को काल्पनिक बताते थे, रामसेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और भगवान राम के अस्तित्व का प्रमाण मांगते थे, वही लोग आज ज्ञान बांटने का काम कर रहे हैं। सनातनी समाज ऐसे लोगों के बहकावे में नहीं आएगा।"
महंत ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गठित एसआईटी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार का षड्यंत्र रचकर लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने की कोशिश की गई तो संत समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जिसके पास भी कोई सबूत है, वह एसआईटी को दे। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ मुख्यमंत्री योगी और उनका प्रशासन निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई करेगा।
आर्य संत वरुण दास महाराज ने भी मुख्यमंत्री योगी के कदम का स्वागत करते हुए इसे समय पर लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि एसआईटी के गठन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का रास्ता खुला है और यदि पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई संभव होगी।
उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छी पहल है। यदि जांच टीम को सबूत मिलते हैं तो इससे जांच को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी बनाकर त्वरित निर्णय लेने की क्षमता दिखाई है। वरुण दास महाराज ने कहा कि मामला धन और चढ़ावे से जुड़ा है, इसलिए जांच को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए ताकि आर्थिक पहलुओं की भी गहन जांच हो सके।
आर्य संत वरुण दास महाराज ने आगे कहा कि राम जन्मभूमि से जुड़े किसी भी प्रकार के वित्तीय विवाद की खबर राम भक्तों को पीड़ा पहुंचाने वाली है। उन्होंने कहा कि यदि चढ़ावे या धन के दुरुपयोग की कोई घटना हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि में चढ़ावे को लेकर जो विवाद सामने आया है, उसने राम भक्तों, वरिष्ठ संतों, कार्यसेवकों और श्रद्धालुओं को मानसिक रूप से व्यथित किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि राम जन्मभूमि से जुड़े प्रबंधन और निगरानी तंत्र में वरिष्ठ साधु-संतों, वरिष्ठ नागरिकों और कार्यसेवकों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
वरुण दास महाराज ने यह भी कहा कि पूरे विवाद के सामने आने के बाद अब तक ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसका पर्दाफाश होना चाहिए और यदि ऐसा कुछ नहीं हुआ है तो उसका स्पष्ट स्पष्टीकरण भी सामने आना चाहिए।
--आईएएनएस
पीएसके
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