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रानी की वाव के 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग शो को वाव अवार्ड्स एशिया 2026 में मिला गोल्ड अवार्ड


गांधीनगर, 13 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात के पाटन स्थित यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट ‘रानी की वाव’ के 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग शो और हेरिटेज लाइटिंग प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिली है। इस इमर्सिव ऑडियो-विजुअल अनुभव को 17वें वॉव अवार्ड्स एशिया 2026 में 'एक्सपीरिएंशियल टेक अवार्ड्स – इवेंट के लिए ऑडियो-विजुअल में उपलब्धि' श्रेणी में गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

गांधीनगर, 13 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात के पाटन स्थित यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट ‘रानी की वाव’ के 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग शो और हेरिटेज लाइटिंग प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिली है। इस इमर्सिव ऑडियो-विजुअल अनुभव को 17वें वॉव अवार्ड्स एशिया 2026 में 'एक्सपीरिएंशियल टेक अवार्ड्स – इवेंट के लिए ऑडियो-विजुअल में उपलब्धि' श्रेणी में गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

‘रानी की वाव’ भारत के प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है और हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती है। पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से गुजरात सरकार ने इस स्मारक परिसर में अत्याधुनिक 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग शो और हेरिटेज लाइटिंग सिस्टम स्थापित किया है।

इस परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मार्च को वर्चुअल माध्यम से किया था। इसके बाद से संबंधित एजेंसी द्वारा शो के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभाली जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, 12 जुलाई तक इस शानदार ऑडियो-विजुअल शो का अनुभव 44,209 से अधिक लोग ले चुके हैं।

वाव अवार्ड्स एशिया 2026 में यह सम्मान परियोजना को प्रस्तुत करने वाली एजेंसी की ओर से नामांकन के बाद मिला। इस पुरस्कार ने गुजरात की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित करने के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

3डी प्रोजेक्शन मैपिंग शो के जरिए रानी की वाव की वास्तुकला, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को एक नए और आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अत्याधुनिक रोशनी, ध्वनि और दृश्य प्रभावों के संयोजन से पर्यटकों को एक अनोखा और यादगार अनुभव मिलता है।

गुजरात सरकार का कहना है कि इस तरह की तकनीक आधारित पहलें न केवल विरासत स्थलों के संरक्षण और प्रचार में मदद करती हैं, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देती हैं। रानी की वाव में शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आया है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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