वाशिंगटन, 17 जून (आईएएनएस)। करीब 16 महीने बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवियन में मिले। जी7 समिट आउटरीच प्रोग्राम के दौरान हुई मुलाकात काफी चर्चा में रही। अब दुनिया पीएम मोदी और ट्रंप की संभावित द्विपक्षीय बैठक पर नजर गड़ाए बैठी है। आईएएनएस से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि हो सकता है अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी गल्तियों को सुधारने का प्रयास करें।
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वाशिंगटन, 17 जून (आईएएनएस)। करीब 16 महीने बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवियन में मिले। जी7 समिट आउटरीच प्रोग्राम के दौरान हुई मुलाकात काफी चर्चा में रही। अब दुनिया पीएम मोदी और ट्रंप की संभावित द्विपक्षीय बैठक पर नजर गड़ाए बैठी है। आईएएनएस से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि हो सकता है अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी गल्तियों को सुधारने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा, " उम्मीद यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ संबंधों को सामान्य करेंगे। कुछ फैसलों और बयानों, जैसे टैरिफ नीतियों और भारत के बारे में की गई टिप्पणियों के कारण रिश्तों में तनाव आया है। अमेरिका ने कई सहयोगी देशों के साथ संबंधों में तनाव पैदा किया है, इसलिए यह जरूरी है कि इस बैठक के बाद भारत के साथ संबंधों को फिर से सामान्य दिशा में लाया जाए।"
उन्होंने उम्मीद जताई कि बैठक के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते स्थिर होंगे और एक प्रमुख लोकतांत्रिक साझेदार के रूप में भारत के साथ सहयोग और मजबूत किया जाएगा।
भारतीय-अमेरिकी सांसद ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और क्षेत्रीय आर्थिक चुनौतियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि टैरिफ में बढ़ोतरी का असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि पहले टैरिफ में काफी वृद्धि की गई थी, जिसे बाद में कुछ हद तक वापस लिया गया, लेकिन इसका असर अभी भी महसूस किया जा रहा है। उनके अनुसार, वर्जीनिया (यहीं के प्रतिनिधि) में कई व्यवसाय भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर निर्भर हैं, और उन्हें इससे नुकसान हुआ है, साथ ही कीमतों में भी वृद्धि देखी गई है।
सुब्रमण्यम ने कहा, "भारत और अमेरिका सहित सभी लोकतांत्रिक साझेदार देशों के लिए यह बेहतर होगा कि वे अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करें और सहयोग के नए रास्ते तलाशें।"
उन्होंने यह भी कहा कि यह साझेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन एशिया में अपने प्रभाव का लगातार विस्तार कर रहा है, ऐसे में लोकतांत्रिक देशों के बीच आर्थिक सहयोग और भी आवश्यक हो जाता है।
वहीं, भारतीय-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ बढ़ती नफरत पर सुब्रमण्यम ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नफरत के हर रूप को सामने लाना और उसका विरोध करना जरूरी है, खासकर तब जब यह भारतीय-अमेरिकी समुदाय को निशाना बनाकर किया जा रहा हो।
सुब्रमण्यम ने बताया कि उन्हें खुद सोशल मीडिया पर नस्लीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है, जहां कुछ लोग उन्हें “वापस अपने देश जाओ” जैसी बातें कहते हैं या उन्हें “असली अमेरिकी नहीं” बताते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में चुप रहना सही नहीं है और जहां भी नफरत या भड़काऊ घटनाएं हों वहां खुलकर आवाज उठानी चाहिए।
--आईएएनएस
केआर/
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