
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक ऐसा मामला आया जिसने न्याय व्यवस्था की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। बिहार की एक महिला अधिकारी, अरुणा कुमारी, जिन्हें रिश्वत लेने के आरोप में दोषी ठहराया गया था, उन्हें शीर्ष अदालत ने जमानत दे दी है। इस फैसले के पीछे की वजह बेहद हैरान करने वाली है। अदालत को बताया गया कि मामले का सबसे अहम सबूत, यानी जब्त की गई रिश्वत की रकम, अब मौजूद नहीं है क्योंकि पुलिस मालखाने में चूहों ने उन नोटों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
यह मामला बिहार के चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर (CDPO) पद से जुड़ा है। अरुणा कुमारी पर 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था, जिस पर पटना उच्च न्यायालय ने उन्हें सजा सुनाई थी। जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो यह तथ्य सामने आया कि पुलिस कस्टडी में रखे गए नोट साक्ष्य के रूप में पेश नहीं किए जा सकते। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस दलील पर गहरी नाराजगी और आश्चर्य व्यक्त किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों का इस तरह नष्ट होना कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने टिप्पणी की कि यह पहली बार नहीं है जब नशीले पदार्थों या नकदी के मामले में चूहों को जिम्मेदार ठहराया गया हो। पीठ ने राज्य पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं व्यवस्था की विश्वसनीयता को खत्म करती हैं। मुख्य साक्ष्य के अभाव और लंबित अपील को देखते हुए, अदालत ने महिला की सजा को स्थगित कर उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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