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री-नीट प्रश्नपत्र के नाम पर 1000 छात्रों से ठगी, गुजरात पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा


अहमदाबाद, 15 जून (आईएएनएस)। गुजरात पुलिस की अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने सोमवार को एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है और राजस्थान के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने टेलीग्राम और सोशल मीडिया के जरिए री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर 1,000 से अधिक छात्रों और उनके अभिभावकों से करोड़ों रुपये की ठगी की।

अहमदाबाद, 15 जून (आईएएनएस)। गुजरात पुलिस की अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने सोमवार को एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है और राजस्थान के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने टेलीग्राम और सोशल मीडिया के जरिए री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर 1,000 से अधिक छात्रों और उनके अभिभावकों से करोड़ों रुपये की ठगी की।

साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 319(2), 54 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि आरोपी टेलीग्राम चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा कर रहे थे कि उनके पास 21 जून को होने वाली री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र और गोपनीय जानकारी मौजूद है।

जांच के दौरान पुलिस ने राजस्थान के सुमेर सिंह मीणा और आकाश मीणा को गिरफ्तार किया। सुमेर सिंह इलेक्ट्रॉनिक्स में आईटीआई पास है और जयपुर में रहता है, जबकि आकाश मीणा अंग्रेजी और हिंदी में बीए स्नातक है तथा उसे कोटा से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने कई टेलीग्राम चैनल और ग्रुप बनाकर छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का लालच दिया। इसके बदले ऑनलाइन पेमेंट, क्यूआर कोड और बैंक खातों के जरिए अग्रिम रकम वसूली जाती थी।

अहमदाबाद के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शरद सिंघल ने स्पष्ट किया कि री-नीट परीक्षा का कोई प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि आरोपी केवल फर्जी दावे कर छात्रों और अभिभावकों से पैसे वसूल रहे थे और भुगतान मिलने के बाद गायब हो जाते थे।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह टेलीग्राम चैनलों पर फर्जी सदस्य और प्रीमियम सदस्य जोड़कर उन्हें विश्वसनीय दिखाता था। गिरोह के सदस्य खुद ही चैनलों में संदेश पोस्ट कर दावा करते थे कि पिछले वर्ष उनका पेपर 80 प्रतिशत तक सही निकला था, जिससे लोग उनके झांसे में आ जाते थे।

जांच के दौरान आरोपियों के पास से कोई भी नीट या अन्य परीक्षा से जुड़ा गोपनीय अध्ययन सामग्री या प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ। पुलिस ने बताया कि दोनों निवेश के नाम पर भी टेलीग्राम ग्रुपों के जरिए साइबर ठगी में शामिल थे और लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर पैसे निवेश कराने के लिए उकसाते थे।

साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार आरोपियों से जुड़े छह बैंक खातों का संबंध देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 12 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से मिला है। जांच में पता चला कि ठगी की रकम पहले गेमिंग वेबसाइटों से जुड़े खातों में भेजी जाती थी और फिर अलग-अलग बैंक खातों के जरिए निकाल ली जाती थी, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके।

पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि आकाश मीणा लगभग 44 साइबर अपराध से जुड़े वेबसाइटों का संचालन कर रहा था और उसके मोबाइल फोन तथा लैपटॉप से करीब आठ टेलीग्राम ग्रुप बरामद हुए हैं। पिछले एक वर्ष में आरोपियों के खातों में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है।

पुलिस का दावा है कि इस गिरोह ने 1,000 से अधिक छात्रों को अपना शिकार बनाया। मामले की जांच के दौरान करीब 1,000 मोबाइल नंबरों और टेलीग्राम चैनलों की पड़ताल की गई है। राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में भी पुलिस की टीमें गिरोह के अन्य सदस्यों, धन हस्तांतरण करने वालों और तकनीकी सहयोगियों की तलाश में जुटी हुई हैं।

साइबर क्राइम ब्रांच ने छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या टेलीग्राम पर परीक्षा का प्रश्नपत्र, परिणाम बदलने या प्रवेश की गारंटी देने वाले किसी भी दावे पर विश्वास न करें और ऐसे किसी भी संदिग्ध संदेश की तुरंत पुलिस को सूचना दें।

--आईएएनएस

डीएससी

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