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रोजाना करते हैं ध्यान का अभ्यास? सफलता के लिए फॉलो करें ये टिप्स

नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। ध्यान, योग की अष्टांग प्रक्रिया का सातवां अंग है, जो मन को एकाग्र कर चित्त की वृत्तियों को रोकता है। यह प्राचीन भारतीय परंपरा में आत्मज्ञान, शांति और समाधि प्राप्ति का प्रमुख साधन रहा है। आज के तनावपूर्ण जीवन में ध्यान का महत्व बहुत बढ़ गया है, क्योंकि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।

नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। ध्यान, योग की अष्टांग प्रक्रिया का सातवां अंग है, जो मन को एकाग्र कर चित्त की वृत्तियों को रोकता है। यह प्राचीन भारतीय परंपरा में आत्मज्ञान, शांति और समाधि प्राप्ति का प्रमुख साधन रहा है। आज के तनावपूर्ण जीवन में ध्यान का महत्व बहुत बढ़ गया है, क्योंकि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।

ध्यान के नियमित अभ्यास से तनाव, चिंता, अवसाद और नकारात्मक भावनाएं कम होती हैं। यह फोकस बढ़ाता है, नींद सुधारता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, इम्युनिटी मजबूत करता है और सकारात्मक भावनाओं को बढ़ावा देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ध्यान न सिर्फ तनाव कम करता है, बल्कि पूरे शरीर को नई ऊर्जा देता है और जीवन में शांति लाता है। शुरुआत में छोटे सेशन से करें और धीरे-धीरे गहराई बढ़ाएं। योग गुरु के मार्गदर्शन में अभ्यास बेहतर होता है।

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा ध्यान में सफलता पाने के लिए कुछ टिप्स के बारे में जानकारी देता है।

शांत स्थान और निश्चित समय चुनें: रोज एक ही जगह और समय पर ध्यान करें। इससे आध्यात्मिक वाइब्रेशन बनते हैं और मन आसानी से शांत होता है।

नियमितता बनाए रखें: रोजाना अभ्यास करें। शुरुआत में 10-15 मिनट से शुरू कर धीरे-धीरे बढ़ाएं। निरंतरता से ही गहरा लाभ मिलता है।

'ओम' का भावपूर्ण जप करें: 'ओम' उच्चारण से मन एकाग्र होता है। यह कंपन शरीर के साथ ही मन को भी शांत करता है।

बुद्धि-तर्क कम करें, विचार करें: विचार आएं तो उन्हें रोकने की कोशिश न करें। बस निर्विचार साक्षी भाव से देखें। इससे मन शांत होता है। दिमाग को किसी निगेटिव चीज में उलझाने से बचें।

मन से जुड़ा प्रतीक, इष्ट या ज्योति चुनें: अपनी पसंद का कोई प्रतीक जैसे ज्योति, इष्टदेव या सांस पर फोकस करें। इससे एकाग्रता आसान होती है।

शरीर को तनावमुक्त रखें: ध्यान से पहले आसन और प्राणायाम जैसे नाड़ीशोधन, भस्त्रिका और भ्रामरी करें। शरीर आरामदायक मुद्रा में हो।

तत्काल फल की आशा न करें: ध्यान के दौरान धैर्य रखें। फल धीरे-धीरे मिलते हैं, लेकिन निरंतर अभ्यास से गहरा परिवर्तन आता है।

--आईएएनएस

एमटी/वीसी

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