
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के बड़ा मलहरा (छतरपुर) से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी अंतरिम राहत प्रदान की है। शीर्ष अदालत ने ग्वालियर हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें उनके निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया गया था। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 जुलाई, 2026 की तारीख तय की है। तब तक मल्होत्रा विधायक के रूप में सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे, हालांकि उन्हें मतदान और मानदेय जैसे लाभों से वंचित रहना होगा।
विधायक मुकेश मल्होत्रा की ओर से राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पैरवी की। उन्होंने दलील दी कि हाईकोर्ट का फैसला निर्वाचित जनप्रतिनिधि के अधिकारों का हनन करता है, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार करते हुए अंतरिम स्थगन (Stay) दे दिया। गौरतलब है कि ग्वालियर हाईकोर्ट ने चुनावी हलफनामे में आपराधिक जानकारी छिपाने के आरोप में मल्होत्रा का निर्वाचन रद्द कर दिया था और उनके प्रतिद्वंद्वी (हारे हुए उम्मीदवार) को विजेता घोषित करने का निर्देश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक पद पर बने रहने की अनुमति तो दी है, लेकिन उन पर कुछ कड़े अंकुश भी लगाए हैं:
वे आगामी राज्यसभा चुनाव में मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सकेंगे।
इस अवधि के दौरान उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाले मानदेय और भत्तों का लाभ नहीं मिलेगा।
वे विधानसभा सत्र में शामिल हो सकते हैं, लेकिन किसी भी विधायी मतदान प्रक्रिया में भाग लेने पर रोक जारी रहेगी।
कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश का स्वागत किया है, लेकिन वोटिंग के अधिकार पर रोक को 'अधूरा न्याय' बताया है। पार्टी के मीडिया प्रभारी मुकेश नायक और विवेक त्रिपाठी ने कहा कि एक निर्वाचित विधायक को राज्यसभा चुनाव में वोट डालने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जल्द ही एक नई याचिका दायर की जाएगी। मुकेश नायक ने तंज कसते हुए कहा कि यह अजीब स्थिति थी जहाँ हारे हुए प्रत्याशी को विधायक घोषित कर दिया गया था, जिसे अब सुधारा गया है।
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