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संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना और उन पर कब्जा करना भाजपा की आदतः प्रियांक खड़गे


बेंगलुरु, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने एसआईआर विवाद पर भाजपा की आलोचना की और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। शिवसेना (यूबीटी) नेता किशोरी पेडनेकर ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर लोकतंत्र और संविधान का अपमान करने का आरोप लगाया।

बेंगलुरु, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने एसआईआर विवाद पर भाजपा की आलोचना की और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। शिवसेना (यूबीटी) नेता किशोरी पेडनेकर ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर लोकतंत्र और संविधान का अपमान करने का आरोप लगाया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हारने पर जनादेश का अपमान करना, यह कांग्रेस की पुरानी आदत है, कांग्रेस के डीएनए में है। इस बयान पर प्रियांक खड़गे ने मीडिया से बातचीत में कहा, "संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना और उन पर कब्जा करना भाजपा की आदत बनती जा रही है। मेरा सीधा सवाल है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को न्यायिक छूट की जरूरत क्यों है? शिवराज सिंह चौहान पहले इसका जवाब दें। तार्किक विसंगति की परिभाषा क्या है? उन्हें इसका जवाब देने दें।"

प्रियांक खड़गे ने कहा, "मध्य प्रदेश में भी सब जानते हैं कि चुनाव कैसे हुए थे। हरियाणा, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल के इस बारे में पूर्व चुनाव आयोग अधिकारी क्या कह रहे हैं? हम बस इतना चाहते हैं कि भारत का चुनाव आयोग सब कुछ साफ-साफ बताए। उसे असल में क्या करना चाहिए? हर कोई जानता है कि सॉफ्टवेयर कैसे बदला जा रहा है। सॉफ्टवेयर का कोई ऑडिट नहीं हो रहा है। अब, एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर को ऑडिट के लिए आईटीआई को सौंपने का फैसला किया है। इससे साफ पता चलता है कि भारत के चुनाव आयोग की मंशा ठीक नहीं थी।"

कर्नाटक भाजपा के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने डीजी-आईजीपी एम.ए. सलीम से मुलाकात की और मांग की कि पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ 'फॉर्म-7' आवेदनों को लेकर एफआईआर दर्ज करने और उनकी समीक्षा करने का काम रोका जाए। इस पर प्रियांक खड़गे ने कहा, "वे असल में यह कह रहे हैं कि जो लोग पहले से भरे हुए (प्री-प्रिंटेड) बड़ी संख्या में 'फॉर्म-7' जमा कर रहे हैं, उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज नहीं होनी चाहिए। यह कानूनी कैसे हो सकता है? जो लोग इन्हें जमा कर रहे हैं, वे बीएलए भी नहीं हैं और अगर कोई बीएलए है भी, तो वह 300-400 फॉर्म कैसे जमा कर सकता है? उन्हें यह जानकारी कहां से मिल रही है? ये फॉर्म पहले से भरे हुए (प्री-प्रिंटेड) होते हैं। इनमें नाम, पता और ईपीआईसी नंबर पहले से लिखा होता है। ऐसा क्यों है कि इनमें समाज के केवल कुछ खास वर्गों के लोगों को ही शामिल किया जाता है? हम बस यह पूछ रहे हैं कि ऐसा करने वाले लोग कौन हैं, वे ऐसा कैसे कर सकते हैं? अगर आप ऐसा करेंगे, तो हम इसकी जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत मामला दर्ज करेंगे।"

शिवसेना (यूबीटी) नेता किशोरी पेडनेकर ने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के काम ने लोकतंत्र और बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान का अपमान किया है। उन्हें इसके नतीजे भुगतने होंगे!"

--आईएएनएस

ओपी/पीएम

Date & Time : 2026-10-04 13:50:03

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