नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने आरएसएस प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा कि संघ संचालक अपनी बात से बहुत जल्दी पलट जाते हैं। 6 अगस्त को उन्होंने युवा आंदोलनों को राष्ट्रवादी बताकर सरकार से संवाद की अपील की थी, लेकिन अब बिल्कुल उल्टा बयान दे रहे हैं।
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नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने आरएसएस प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा कि संघ संचालक अपनी बात से बहुत जल्दी पलट जाते हैं। 6 अगस्त को उन्होंने युवा आंदोलनों को राष्ट्रवादी बताकर सरकार से संवाद की अपील की थी, लेकिन अब बिल्कुल उल्टा बयान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की संवैधानिक संस्थाओं को अल्बानिया की तरह तहस-नहस किया जा रहा है और चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, और सीबीआई-ईडी पर कब्जे से देश बर्बाद हो रहा है, हालांकि भारत बुद्ध और गांधी का देश होने की वजह से यहां हिंसक भीड़तंत्र नहीं होगा।
कांग्रेस ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने कहा, "संघ संचालक अपनी बात से बहुत जल्दी पलट जाते हैं।उन्होंने 6 अगस्त को कहा था कि युवाओं के जो आंदोलन हैं, वे हमारे राष्ट्रवादी बच्चे हैं, नौजवान हैं और सरकार को चाहिए कि उनसे संवाद करे, उनसे बातचीत करे और उन्हें प्रोत्साहित करे। अब पता नहीं दो महीने में ऐसी क्या बात हो गई कि सरसंघचालक अपने 6 अगस्त के बयान से बिल्कुल पलट चुके हैं और बिल्कुल उल्टा बयान दे रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि जिस तरह से वे अल्बानिया और अन्य देशों का जिक्र कर रहे हैं तो यह उन देशों का जिक्र है जहां की संवैधानिक संस्थाओं को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया गया। अल्बानिया में आपने देखा कि वहां का जो सुप्रीम कोर्ट था, वह सरकार की इच्छा के अनुरूप फैसले देता था और उन फैसलों में बिल्कुल भी न्याय नहीं होता था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मेरे पास यह पुस्तक है, जिसे मैं आजकल पढ़ रहा हूं और मैं समझता हूं कि हर राजनेता को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए। "व्हाय नेशंस फेल।" कोई देश कैसे बर्बाद होता है, यह उसमें बताया गया है। इसके लेखक डैरोन एसेमोग्लू और जेम्स रॉबिन्सन हैं। इन्हें इस शोध के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है कि जिन देशों में संवैधानिक संस्थाएं खत्म हो जाती हैं और जहां अभिजात वर्ग कानून को अपने हिसाब से तोड़ता-मरोड़ता है, संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर लेता है, वे देश बर्बाद हो जाते हैं। भारत में भी ऐसा ही हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत बर्बाद हो चुका है। जिस तरह से संवैधानिक संस्थाओं, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट आदि को प्रभावित किया गया है, सीबीआई और ईडी का तो पहले ही हो चुका है, लेकिन बहुत बड़ा फर्क है जो ये अल्बानिया, फ्रांस, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका का उदाहरण दे रहे हैं और हमारे आंदोलन में, क्योंकि भारत बुद्ध और गांधी का देश है। यहां बाबा साहब अंबेडकर के संविधान को मानने वाले लोग हैं।
अनिल जयहिंद ने कहा कि जो आंदोलन चल रहा है, उसमें बिल्कुल भी हिंसा नहीं हो रही। अगर हिंसा हो रही है तो वह राज्य और पुलिस द्वारा हो रही है, या फिर वे लोग कर रहे हैं जो अपने आपको हिंदू बताते हैं। हिंदू कभी लफंगा नहीं होता, लेकिन जो लोग अपने आपको हिंदू बताकर गाजियाबाद से, दूरदराज के इलाकों से आ जाते हैं, वे हिंसा कर रहे हैं। छोटी-छोटी 15-15 साल की बच्चियों को, जबकि नवरात्रि चल रही है, छह-छह लोग मिलकर पीट रहे हैं। ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। ऐसा तो रावण के राज में भी नहीं हुआ होगा।
उन्होंने कहा कि स्थितियां बहुत खराब हैं भारत में, यह सही है लेकिन मैंने फिर आपसे कहा कि यहां महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन का असर लोगों पर है। यह बुद्ध का देश है। यह शांति में विश्वास करता है और पूरे विश्व को शांति का संदेश देता है। इसलिए मैं नहीं समझता कि यहां भीड़ के द्वारा हिंसा होगी। जितने भी आंदोलन चल रहे हैं, छोटी-छोटी बच्चियां मार खा रही हैं, लेकिन वे प्रतिवाद नहीं कर रही हैं। उनकी ओर से कोई प्रतिकार नहीं हो रहा।
फ्रांस के आंदोलन को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि आंदोलन क्यों हो रहे हैं? फ्रांस में जो स्थितियां हैं, वैसी ही स्थितियां यहां भी हैं। महंगाई है, बेरोजगारी है। भारत में यह आंकड़ा मोदी सरकार के नीति आयोग का है, हमारा नहीं। नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार 15 से 29 वर्ष तक के युवाओं की एक बहुत बड़ी संख्या, लगभग 8 करोड़ 70 लाख, यानी जर्मनी की आबादी से भी अधिक, ऐसी है जो न तो रोजगार में है, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण में।
उन्होंने कहा कि वे खाली बैठे हैं और कहा भी जाता है कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है। ऐसे में वे रील बना रहे हैं, गालियां दे रहे हैं और नफरत फैलाने वाले कामों में लग रहे हैं लेकिन उन्हें धीरे-धीरे यह एहसास हो रहा है कि यह सरकार रोजगार देने के लिए काम नहीं कर रही, जबकि उसे करना चाहिए। इसलिए उसकी प्रतिक्रिया भी होगी। ऐसा हमेशा होता है।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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