नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने प्रदेश सरकार द्वारा सोशल मीडिया से संबंधित कई जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर 70 प्रतिशत से ज्यादा खबरें फेक होती हैं। टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में ऐसे लोगों को देश और समाज से मतलब नहीं रखते हैं।
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नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने प्रदेश सरकार द्वारा सोशल मीडिया से संबंधित कई जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर 70 प्रतिशत से ज्यादा खबरें फेक होती हैं। टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में ऐसे लोगों को देश और समाज से मतलब नहीं रखते हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कई जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों, जिनमें काउंसिल स्कूलों में बिना इजाजत बाहरी लोगों, यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के आने पर रोक लगाने और वीडियोग्राफी पर पाबंदी लगाने की बात कही गई है।
इस पर मंत्री संजय निषाद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "सोशल मीडिया समाज को सही संदेश और दिशा देने के लिए बनाया गया था, लेकिन आप समझ सकते हैं कि सोशल मीडिया किस तरह का विश्वविद्यालय बन गया है। 70 प्रतिशत से ज्यादा खबरें फेक होती हैं, कुछ भी मनगढ़ंत बातें बनाई जा सकती हैं। एक फेक न्यूज को ठीक करने में बहुत समय लगता है। हमारा मानना है कि मीडिया के जरिए फैलाए जा रहे गुमराह करने वाले प्रचार का असर बच्चों के दिमाग या शिक्षा के क्षेत्र पर नहीं पड़ना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें पोस्ट कर लोग टीआरपी बढ़ाने की कोशिश करते रहते हैं। ऐसे लोगों को न तो समाज से मतलब है और न ही देश से। ये सभी विदेशी प्लेटफॉर्म हैं। विदेशी प्लेटफॉर्म पर हम अपने देश की इज्जत को रख रहे हैं। मेरा मानना है कि यह रोक हर तरीके से सही है।
सीडब्ल्यूसी के बैठक में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के दो पैरा गाने के फैसले पर संजय निषाद ने कांग्रेस पार्टी की आलोचना की। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि इसी चरित्र की वजह से कांग्रेस सत्ता से बाहर है।
उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर पर हाई कोर्ट के सवाल उठाने और एक मामले की जांच सीबीआई को सौंपने पर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने कहा, "कुछ मामले निश्चित रूप से संदिग्ध होते हैं, और जब कोर्ट को उन पर शक होता है तो वह कार्रवाई करता है।"
उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेशों का सभी को सम्मान करना चाहिए। कोर्ट का काम परीक्षण करना है, जिसके आधार पर फैसले लिए जाते हैं। सच्चाई निश्चित तौर पर सामने आएगी।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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