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सतना: नवविवाहिता की मौत पर अस्पताल में हंगामा, घंटों फंसा रहा शव

सतना शहर स्थित सिविल लाइन थाना क्षेत्र में सोमवार को उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब एक 22 वर्षीय नवविवाहिता की मौत के बाद उसके मायके और ससुराल पक्ष के लोग आपस में भिड़ गए। यह विवाद इतना गहरा गया कि मृतका के शव को करीब चार घंटे तक एंबुलेंस में ही रखना पड़ा। घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल परिसर में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। मृतका की पहचान कीर्ति सोनी के रूप में हुई है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के भैंसोंदा की रहने वाली थी और पिछले कुछ समय से सतना में रह रही थी।

कीर्ति ने लगभग चार साल पहले अतर्रा निवासी बबलू उर्फ बृजेन्द्र सोनी से प्रेम विवाह किया था। बबलू सतना की एक निजी यूनिवर्सिटी में ड्राइवर के पद पर कार्यरत है। प्रेम विवाह होने के कारण कीर्ति का अपने मायके वालों से संपर्क लगभग खत्म हो चुका था, क्योंकि परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। वे अपनी तीन वर्षीय बेटी के साथ सतना के पतेरी इलाके में किराए के मकान में जीवन यापन कर रहे थे।

इलाज के दौरान मौत और मायके पक्ष के गंभीर आरोप

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार की रात कीर्ति को अचानक तेज बुखार आया था। तबीयत अधिक बिगड़ने पर पति बबलू उन्हें रात करीब 10 बजे जिला अस्पताल सतना लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कीर्ति को तुरंत आईसीयू (ICU) में भर्ती कर लिया। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद सोमवार सुबह करीब 5 बजे उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

जैसे ही कीर्ति की मौत की खबर उसके मायके पक्ष तक पहुँची, पिता राममिलन अपने रिश्तेदारों के साथ अस्पताल पहुँच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कीर्ति की मौत सामान्य नहीं है और इसकी परिस्थितियां संदिग्ध हैं। मायके वालों का मुख्य गुस्सा इस बात पर था कि उन्हें कीर्ति की बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की सूचना समय पर क्यों नहीं दी गई। उन्होंने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

एंबुलेंस में रखा रहा शव, बुजुर्गों के हस्तक्षेप से थमा विवाद

विवाद इतना बढ़ गया कि जब ससुराल पक्ष शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की कोशिश कर रहा था, तब मायके पक्ष ने एंबुलेंस को रोक दिया। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके कारण अस्पताल प्रशासन और वहां मौजूद गार्ड्स को हस्तक्षेप करना पड़ा। करीब चार घंटों तक शव एंबुलेंस में ही पड़ा रहा, जो मानवीय दृष्टिकोण से भी काफी दुखद स्थिति थी।

काफी देर तक चले इस हंगामे के बाद स्थानीय पुलिस को भी सूचित किया गया। अंततः दोनों पक्षों के वरिष्ठ सदस्यों और बुजुर्गों ने बीच-बचाव किया। काफी समझाने-बुझाने के बाद मायके पक्ष इस शर्त पर शांत हुआ कि वे अपनी बेटी को अंतिम विदाई देने की प्रक्रियाओं में शामिल होंगे। मामला शांत होने के बाद ससुराल पक्ष शव को लेकर रवाना हो सका। सिविल लाइन थाना पुलिस फिलहाल इस मामले में मर्ग कायम कर जांच कर रही है ताकि मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सके।

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