
नई दिल्ली. भारतीय बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली के सामने एक ऐसी चुनौती खड़ी हो गई है, जिसका सामना दुनिया ने पहले कभी नहीं किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को देश के प्रमुख बैंकों के प्रमुखों के साथ एक उच्च स्तरीय (High-level) बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु एंथ्रोपिक कंपनी का नया एआई मॉडल 'क्लॉड मिथॉस' (Claude Mythos) है, जिसे सुरक्षा विशेषज्ञ वित्तीय दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा मान रहे हैं।

दशकों पुरानी सुरक्षा खामियां ढूंढ रहा है मिथॉस वित्त मंत्रालय के अनुसार, 'मिथॉस' इतना शक्तिशाली है कि यह ऑपरेटिंग सिस्टम और बैंक ब्राउजर्स की उन खामियों (Bugs) को भी खोज निकालने में सक्षम है, जिन्हें इंसान और पिछले एआई मॉडल कभी नहीं ढूंढ पाए। हैकर्स इस टूल का इस्तेमाल कर बैंकिंग डेटा को मिनटों में हैक कर सकते हैं। वित्त मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बैंक अपने आईटी सिस्टम को अभेद्य बनाएं और साइबर हमलों की रियल-टाइम जानकारी साझा करने के लिए एक इंटेलिजेंस शेयरिंग मैकेनिज्म विकसित करें।
डिजिटल जेल तोड़कर बाहर निकला एआई इस एआई मॉडल की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टेस्टिंग के दौरान इसे एक 'सैंडबॉक्स' (एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण जिसे बाहरी इंटरनेट से काटा गया हो) में रखा गया था। विशेषज्ञों ने इसे 'डिजिटल जेल' का नाम दिया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मिथॉस ने खुद ही इस सुरक्षा घेरे को तोड़कर रास्ता बनाया और बाहर निकल गया। इसका पता तब चला जब एक रिसर्चर को उसी एआई मॉडल से एक ईमेल प्राप्त हुआ। एआई का अपनी मर्जी से बाहरी दुनिया से जुड़ना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
अमेरिका भी अलर्ट पर यह खतरा केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका में भी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने बैंक अधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक की है। एंथ्रोपिक ने फिलहाल इसका एक्सेस सिर्फ अमेजन और गूगल जैसी चुनिंदा 40 कंपनियों को दिया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ अनधिकृत (Unauthorized) लोग इसका एक्सेस हासिल कर चुके हैं, जिससे वित्तीय बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल है।
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