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सीधी: खजुरी के जंगल में भीषण आग, 15 हेक्टेयर वन क्षेत्र खाक

सीधी जिले अंतर्गत ग्राम खजुरी के जंगलों में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब अज्ञात कारणों से भीषण आग भड़क उठी। जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह लगभग 10 बजे लगी इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और करीब 15 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि दूर-दूर से धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता था। जंगल में मौजूद सूखी लकड़ियों और घास के कारण आग ने तेजी से विस्तार किया, जिससे बहुमूल्य वनस्पतियों और वन्यजीवों के आवास को गंभीर खतरा पैदा हो गया।

इस प्राकृतिक आपदा की पहली सूचना स्थानीय ग्रामीण पुष्पेंद्र शर्मा ने सीधी स्थित वन विभाग के कंट्रोल रूम को दी। सूचना मिलते ही वन अमला सक्रिय हुआ और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई। दोपहर 2 बजे तक आग की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई थी, लेकिन टीम के सामूहिक प्रयासों ने इसे और अधिक फैलने से रोक लिया।

वन विभाग और ग्रामीणों का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन

आग बुझाने के लिए वनपाल पंकज मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में केवल वनकर्मी ही नहीं, बल्कि 12 पुलिसकर्मियों की एक टुकड़ी, फायर ब्रिगेड और 10 से अधिक जांबाज ग्रामीण भी शामिल हुए। जंगल की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आधुनिक मशीनों का पहुंचना चुनौतीपूर्ण था, जिसके कारण आग पर काबू पाने के लिए पारंपरिक और स्थानीय तरीकों का जमकर इस्तेमाल किया गया।

आग पर नियंत्रण पाने के लिए 'फायर लाइन' बनाने की तकनीक अपनाई गई, जिसमें हरे पेड़ों के आसपास से सूखे पत्तों और टहनियों को हटाया गया ताकि आग का संपर्क टूट सके। इसके साथ ही, वनकर्मियों और ग्रामीणों ने हरे पेड़ों की टहनियों का उपयोग कर लपटों को पीट-पीटकर दबाने का प्रयास किया। भीषण गर्मी और तेज हवाओं के बावजूद टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर जंगल को बचाने का काम जारी रखा।

80 प्रतिशत आग पर नियंत्रण, निगरानी जारी

वनपाल पंकज मिश्रा ने बताया कि चार घंटे से अधिक समय तक चली लगातार मशक्कत के बाद लगभग 80 प्रतिशत आग पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पा लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम का प्राथमिक उद्देश्य जंगल के प्रत्येक पेड़ और जैव विविधता को सुरक्षित रखना है। वर्तमान में शेष बचे 20 प्रतिशत हिस्से में भी आग बुझाने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।

प्रशासन अब आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रहा है। शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि बढ़ते तापमान या किसी की मानवीय भूल के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल क्षेत्र में बीड़ी-सिगरेट या जलती हुई वस्तुएं न फेंकें, क्योंकि सूखे मौसम में एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े विनाश का कारण बन सकती है। फिलहाल, टीम मौके पर कैंप कर रही है ताकि दोबारा आग सुलगने की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

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