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सीएमजी की डॉक्यूमेंट्री ‘पोटाला महल’ 23 जून से प्रसारित


बीजिंग, 24 जून (आईएएनएस)। विश्व धरोहर स्थल पोटाला महल दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित और सबसे अच्छी तरह संरक्षित महल-किला परिसर माना जाता है। यह मध्य मैदानी राजवंशों के लिए सीमावर्ती शासन का एक ऐतिहासिक आदर्श है और चीन में विभिन्न जातीय समूहों के आदान-प्रदान और एकीकरण का प्रमाण है।

बीजिंग, 24 जून (आईएएनएस)। विश्व धरोहर स्थल पोटाला महल दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित और सबसे अच्छी तरह संरक्षित महल-किला परिसर माना जाता है। यह मध्य मैदानी राजवंशों के लिए सीमावर्ती शासन का एक ऐतिहासिक आदर्श है और चीन में विभिन्न जातीय समूहों के आदान-प्रदान और एकीकरण का प्रमाण है।

सदियों के लंबे इतिहास में पोटाला महल राजनीति, धर्म, संस्कृति और कला का एक अनूठा केंद्र रहा है, जिससे जुड़ी अनेक ऐतिहासिक और लोककथाएं आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं।

चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) और शीत्सांग रेडियो एवं टेलीविजन स्टेशन द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित सात एपिसोड वाली ऐतिहासिक और सांस्कृतिक डॉक्यूमेंट्री ‘पोटाला महल’ का प्रसारण 23 से 29 जून तक किया जा रहा है। यह श्रृंखला विश्व धरोहर पोटाला महल को केंद्र में रखकर बर्फीले पठार के लगभग एक हजार वर्षों के इतिहास को प्रस्तुत करती है और शीत्सांग तथा मातृभूमि के साझा विकास की कहानी दिखाती है।

डॉक्यूमेंट्री में पोटाला महल के हजार साल के इतिहास के माध्यम से बौद्ध धर्म के चीनीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया को दर्शाया गया है। यह शीत्सांग में क्रमिक केंद्रीय सरकारों द्वारा शासन के इतिहास का सजीव वर्णन करती है, चीनी राष्ट्र के लिए एक साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के अंतर्निहित तर्क को गहराई से स्पष्ट करती है, और शीत्सांग में धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करने एवं जातीय संस्कृति की रक्षा करने की चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों को व्यापक रूप से प्रतिबिंबित करती है, जिससे तिब्बती लोगों को पूर्ण विकास का अधिकार प्राप्त हो सके। यह नए युग में समाजवादी शीत्सांग के नए स्वरूप को प्रदर्शित करती है।

इसके साथ ही, यह डॉक्यूमेंट्री श्रृंखला पोटाला महल से प्राप्त ऐतिहासिक कलाकृतियों का उपयोग करती है, जिनमें थांगखा चित्र, बौद्ध प्रतिमाएं, भित्ति चित्र, पत्र सूत्र, सोने-चांदी की कलाकृतियां आदि शामिल हैं, ताकि शीत्सांग और चीन के भीतरी इलाके के बीच रक्त संबंधों को दर्शाया जा सके।

साथ ही, डॉक्यूमेंट्री के उत्कृष्ट दृश्य तिब्बती संस्कृति के प्रति चीन के संरक्षण को पूरी तरह से प्रदर्शित करते हैं, जिससे यह तिब्बती सांस्कृतिक और कलात्मक खजानों का एक शानदार संग्रह बन जाता है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

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