
उज्जैन. वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले भव्य सिंहस्थ महाकुंभ में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) को लेकर मध्य प्रदेश पुलिस ने व्यापक योजना तैयार की है। इस बार महाकुंभ में लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जो पिछले सिंहस्थ (7 करोड़) की तुलना में चार गुना से अधिक है। घाटों का विस्तार भी 28 किलोमीटर तक किया जा रहा है। इतनी विशाल भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रही है।
सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को अलग-अलग सुरक्षा ज़ोन में विभाजित किया जाएगा।
ड्रोन और एआई निगरानी: ड्रोन कैमरों और 1500 से अधिक एआई (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भीड़ के घनत्व (Density) और मूवमेंट का रीयल-टाइम डेटा मिलेगा। क्षमता से अधिक भीड़ होने पर एआई कैमरे स्वतः अलर्ट भेजेंगे।
फेस रिकग्नीशन और नैफीस (NAFIS): संदिग्धों की पहचान के लिए कैमरों में फेस रिकग्नीशन सिस्टम रहेगा। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) से संदिग्धों का डेटा सर्वर में फीड किया जाएगा, जिससे उनके सामने आते ही पुलिस अलर्ट हो जाएगी।
खोया-पाया एवं सुविधा ऐप: अपनों से बिछड़े लोगों को ढूंढने के लिए विशेष 'खोया-पाया' ऐप लॉन्च किया जाएगा। इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक अलग ऐप बनेगा जिसमें आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर, घाटों की जानकारी और नक्शे उपलब्ध रहेंगे।
सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश के प्रयागराज कुंभ मॉडल को भी अपनाया जा रहा है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यशाला में यूपी पुलिस के अधिकारियों के साथ क्राउड कंट्रोल और रेलवे सुरक्षा रणनीतियों पर मंथन किया गया।
| सुरक्षा उपाय | कार्ययोजना व रणनीति |
| सेटेलाइट रेलवे स्टेशन | शहर में एक साथ भीड़ को रोकने के लिए 3 से 4 सेटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे। |
| वाहन नियंत्रण | बाहरी जिलों से आने वाले वाहनों को उज्जैन की सीमाओं पर ही रोका जाएगा, स्थान खाली होने पर ही शहर में प्रवेश मिलेगा। |
| मास्टर ट्रेनर्स | सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए प्रदेश भर से 200 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए गए हैं, जो अन्य पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। |
| एकीकृत सुविधाएं | मेला क्षेत्र में प्रत्येक पुलिस स्टेशन के साथ ही फायर सेफ्टी स्टेशन (Fire Safety Stations) भी स्थापित किए जाएंगे। |
प्रशासन का मुख्य ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि 28 किलोमीटर लंबे घाटों और पूरे मेला क्षेत्र में तकनीक के ज़रिए बिना किसी बाधा के सुरक्षित और सुगम स्नान संपन्न कराया जा सके।
Leave A Reviews