चेन्नई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा विधायक वानति श्रीनिवासन ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए तमिलनाडु सरकार पर केंद्र के 'स्मार्ट सिटीज मिशन' के तहत आवंटित फंड के गलत प्रबंधन का आरोप लगाया है।
![]()
चेन्नई, 9 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा विधायक वानति श्रीनिवासन ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए तमिलनाडु सरकार पर केंद्र के 'स्मार्ट सिटीज मिशन' के तहत आवंटित फंड के गलत प्रबंधन का आरोप लगाया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में वानति श्रीनिवासन ने कहा कि ऑडिट से पता चला है कि इस प्रोग्राम के तहत तमिलनाडु में कई प्रोजेक्ट्स में गंभीर गड़बड़ियां थीं। इस प्रोग्राम का मकसद शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर, पब्लिक सर्विस और लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना था। उन्होंने कहा कि ऑडिट में 10,000 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स शामिल थे, जिनमें 2015 से 2023 के बीच हुए काम की जांच की गई।
उनके मुताबिक, रिपोर्ट में पाया गया कि 1,602.20 करोड़ रुपए की लागत वाले 52 प्रोजेक्ट्स पर काम ही नहीं हुआ। भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी के फंड का इस्तेमाल ऐसे कामों के लिए किया गया, जिन्हें नगर निगमों को अपने रेगुलर फंड से करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच प्रोजेक्ट्स, जिनकी कुल लागत 21.42 करोड़ रुपए थी, के लिए मिशन के फंड का इस्तेमाल किया गया।
श्रीनिवासन ने दावा किया कि ऑडिट में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की गाइडलाइंस का पालन न किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के रोजमर्रा के कामों को स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत लाकर राज्य के अधिकारियों ने प्रोग्राम के असली मकसद को कमजोर कर दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि रिपोर्ट में ऐसे कामों पर हुए खर्च का जिक्र है जिन्हें मिशन के तहत मंजूरी नहीं मिली थी। आरोप है कि फंड का इस्तेमाल सरकारी दफ्तरों के लिए कार और फर्नीचर खरीदने और सरकारी प्रचार से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए भी किया गया।
एक और मुद्दा जो उठाया गया, वह था स्मार्ट सिटी फंड का तमिलनाडु सरकार के विभागों के फाइनेंशियल अकाउंट्स में ट्रांसफर किया जाना, जिसे श्रीनिवासन ने तय नियमों का उल्लंघन बताया। भाजपा विधायक ने कहा कि इन नतीजों से उन दावों पर सवाल उठते हैं जिनमें कहा गया था कि केंद्र सरकार से पर्याप्त फाइनेंशियल मदद न मिलने की वजह से तमिलनाडु का विकास प्रभावित हुआ है।
उन्होंने तर्क दिया कि ऑडिट से पता चलता है कि केंद्र से मिले पैसे का भी सही या पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ। नतीजों को चौंकाने वाला बताते हुए, श्रीनिवासन ने देरी, फंड के गलत इस्तेमाल और स्कीम के मंजूर लक्ष्यों से हटकर किए गए खर्च के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि इन कमियों का असर उन प्रोजेक्ट्स पर पड़ा है जो शहरों को आधुनिक बनाने और निवासियों के लिए जरूरी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बनाए गए थे।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
Leave A Reviews