
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों में एक बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार करीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा (Tourist Visa) सेवाओं को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रही है। साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प और उसके बाद उपजे सीमा विवाद के कारण इन सेवाओं पर रोक लगा दी गई थी। अब दोनों देशों के बीच बेहतर होते संवाद के बीच यह कदम उठाया जा रहा है।
रिश्तों में सुधार की ओर बढ़ते कदम भारत सरकार का यह फैसला द्विपक्षीय संबंधों में धीरे-धीरे आ रही नरमी का परिणाम है। इससे पहले दोनों देशों ने सीधी उड़ानें (Direct Flights) फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी। साथ ही, श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी बहाल कर दिया गया है। नए वीजा नियम मुख्य भूमि चीन के अलावा हांगकांग और मकाऊ से आने वाले पर्यटकों पर भी समान रूप से लागू होंगे, जिससे पर्यटन क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा सरकार के इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य पर्यटन, व्यापार और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी मेलजोल (People-to-People contact) को फिर से जीवित करना है। पिछले कुछ वर्षों से जारी तनाव की वजह से व्यापारिक वीजा और पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप थीं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक हितों पर असर पड़ रहा था। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वीजा बहाली की प्रक्रिया सामान्य नियमों के तहत होगी, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ विशेष प्रोटोकॉल और पाबंदियां अब भी लागू रह सकती हैं।
आर्थिक और सांस्कृतिक मजबूती की उम्मीद राजनयिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से न केवल पर्यटन राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी एक नई दिशा मिलेगी। भारतीय व्यापारिक समुदाय ने सरकार के इस रुख का स्वागत किया है, क्योंकि इससे द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में आसानी होगी। दोनों देश अब अपने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में कदम बढ़ाते नजर आ रहे हैं। यह बदलाव एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
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