
नई दिल्ली। देश की न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक बड़ा कदम उठाया है। कॉलेजियम ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के लिए 10 अधिवक्ताओं और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों के नामों को न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दे दी है। लंबे समय से इन रिक्त पदों को भरने की मांग की जा रही थी, जिससे अब अदालतों की कार्यक्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।
अनुभवी अधिवक्ताओं के नामों पर मुहर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के लिए जिन 10 नामों को मंजूरी दी गई है, उनमें मोनिका छिब्बर शर्मा, हरमीत सिंह देओल, पूजा चोपड़ा, सुनीश बिंदलिश, नवदीप सिंह, दिव्या शर्मा, रविंदर मलिक, प्रविन्द्र सिंह चौहान, राजेश गौर और मिंदरजीत यादव के नाम शामिल हैं। इन नामों में प्रविन्द्र सिंह चौहान का नाम विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि वे वर्तमान में हरियाणा सरकार के एडवोकेट जनरल के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। वहीं, हरमीत सिंह देओल पंजाब सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता (Additional Advocate General) के रूप में कार्यरत हैं।
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में भी होंगी नई नियुक्तियाँ कॉलेजियम ने केवल पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ही नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायिक रिक्तियों को भरने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। कॉलेजियम ने तीन न्यायिक अधिकारियों को न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन अधिकारियों में सुनीथा गांधीम, अलापति गिरिधर और पुरुषोत्तम कुमार चिंतलापुडी के नाम शामिल हैं। इन नियुक्तियों से दक्षिण भारतीय राज्य की उच्च न्यायिक प्रणाली को और अधिक मजबूती मिलने की संभावना है।
नियुक्ति की आगामी प्रक्रिया कॉलेजियम की ओर से इन नामों को हरी झंडी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव आधिकारिक रूप से केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। नियमानुसार, केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने और अंततः महामहिम राष्ट्रपति की अंतिम मुहर के बाद ही इन नियुक्तियों की आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े कानूनी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए ये नियुक्तियाँ मील का पत्थर साबित होंगी।
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