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सूरत में बाढ़ प्रभावित परिवारों में 1.5 करोड़ रुपए की राहत राशि बांटी गई


सूरत, 10 जुलाई (आईएएनएस)। सूरत जिला प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित 2,500 परिवारों को दो दिनों के भीतर 1.5 करोड़ रुपए की राहत राशि बांटी है। जलभराव वाले इलाकों में सर्वे का काम जारी है। साथ ही बीमा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे हाल की भारी बारिश में नुकसान उठाने वाले व्यापारियों के मुआवजे के दावों पर तेजी से कार्रवाई करें।

सूरत, 10 जुलाई (आईएएनएस)। सूरत जिला प्रशासन ने बाढ़ से प्रभावित 2,500 परिवारों को दो दिनों के भीतर 1.5 करोड़ रुपए की राहत राशि बांटी है। जलभराव वाले इलाकों में सर्वे का काम जारी है। साथ ही बीमा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे हाल की भारी बारिश में नुकसान उठाने वाले व्यापारियों के मुआवजे के दावों पर तेजी से कार्रवाई करें।

जिला कलेक्टर तेजस परमार ने बताया कि सूरत शहर के कई हिस्सों में बाढ़ से हुए नुकसान के तुरंत बाद सर्वे टीमें तैनात कर दी गई थीं। प्रशासन के मुताबिक, नुकसान का आकलन करने और पात्र लाभार्थियों की पहचान करने के लिए शहर के छह तालुका में अभी 50 सर्वे टीमें काम कर रही हैं।

परमार ने कहा, "सूरत शहर में बाढ़ के कारण कई इलाकों में जलभराव से नुकसान हुआ। तुरंत सर्वे का काम शुरू किया गया और नगद सहायता व घरेलू सामान के लिए मदद देने की प्रक्रिया शुरू की गई।"

उन्होंने बताया कि नगद सहायता और घरेलू सामान के लिए मदद के तौर पर 2,500 परिवारों को पहले ही 1.5 करोड़ रुपए की सहायता दी जा चुकी है। सभी प्रभावित इलाकों में सर्वे अभी जारी है और जिन परिवारों को अभी तक मदद नहीं मिली है, उन्हें सत्यापन पूरा होने के बाद सहायता मिलेगी।

प्रशासन ने उन व्यवसायों को हुए आर्थिक नुकसान को दूर करने के प्रयास भी शुरू कर दिए हैं जिनके कमर्शियल प्रतिष्ठान, दुकानें और औद्योगिक शेड बाढ़ की चपेट में आ गए थे।

परमार ने कहा कि व्यापारियों के लिए राहत उपायों पर विचार किया जा रहा है और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दावों पर बिना किसी अनावश्यक देरी के कार्रवाई हो।

अधिकारियों ने कहा, "बीमा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी पात्र दावों को जल्द से जल्द स्वीकार करें और उनका निपटारा करें, साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि इस प्रक्रिया के दौरान दावा करने वालों को कम से कम परेशानी हो।"

बीमा कंपनियों, उद्योगों और व्यापारी समुदाय के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए जिला प्रशासन ने दावों के निपटारे में मदद के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।

परमार ने यह भी घोषणा की कि जल्द ही व्यापारियों और एजेंसियों के लिए एक ऑनलाइन शिकायत पोर्टल शुरू किया जाएगा। पोर्टल के जरिए की गई शिकायतें समाधान के लिए सीधे संबंधित बीमा कंपनियों को भेजी जाएंगी।

कलेक्टर ने व्यवसायों को बाढ़ के बाद की स्थिति का फायदा उठाकर ज्‍यादा दाम वसूलने के खिलाफ चेतावनी भी दी।

उन्होंने कहा, "प्रशासन को शिकायतें मिली थीं कि बाढ़ के बाद कुछ मरम्मत की दुकानें, जिनमें ऑटोमोबाइल और मशीनरी मरम्मत वर्कशॉप के साथ-साथ अनाज की दुकानें भी शामिल हैं, सामान्य से ज्‍यादा दाम वसूल रही थीं।"

परमार ने चेतावनी देते हुए कहा कि आपदा के समय ज्‍यादा दाम वसूलने वाले किसी भी दुकानदार या व्यक्ति के खिलाफ सख्‍त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा, "यह एक-दूसरे की मदद करने का समय है, न कि ज्‍यादा दाम वसूलकर लोगों की मुश्किलों का फायदा उठाने का।"

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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