चेन्नई, 26 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने सिविल मामलों में राज्य का पक्ष रखने के लिए 17 वकीलों को अस्थायी रूप से नियुक्त किया है। ये सभी वकील मद्रास हाई कोर्ट और उसकी मदुरै बेंच में तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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चेन्नई, 26 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने सिविल मामलों में राज्य का पक्ष रखने के लिए 17 वकीलों को अस्थायी रूप से नियुक्त किया है। ये सभी वकील मद्रास हाई कोर्ट और उसकी मदुरै बेंच में तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
जानकारी के अनुसार सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नियुक्तियां तब तक प्रभावी रहेंगी, जब तक “मद्रास हाई कोर्ट और उसकी मदुरै बेंच के विधि अधिकारियों (नियुक्ति) नियम, 2017” के तहत नियमित विधि अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो जाती।
इस संबंध में जारी सरकारी आदेश के अनुसार, ये नियुक्तियां तमिलनाडु के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) की सिफारिश पर की गई हैं। आदेश में कहा गया है कि नियुक्तियां वर्ष 2017 के नियमों के नियम 5(11) के अंतर्गत की गई हैं। नियुक्त किए गए वकील मद्रास हाई कोर्ट के “स्टेट गवर्नमेंट प्लीडर” कार्यालय तथा मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के “गवर्नमेंट प्लीडर” कार्यालय के अधीन कार्य करेंगे।
सरकार द्वारा जारी सूची के अनुसार, मद्रास हाई कोर्ट के “स्टेट गवर्नमेंट प्लीडर” कार्यालय से संबद्ध अस्थायी वकीलों में डॉ. आर. गौरी, जी. धना माधुरी, मोहम्मद फैयाज अली, एम. शिववर्धनन, एम. गुरुप्रसाद, अमृतपूनकोडी दिनाकरन, के. सतीश, के. सुरेंद्र और डोमिनिक एस. डेविड शामिल हैं। इन सभी को विभिन्न सिविल मामलों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
वहीं, मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के “गवर्नमेंट प्लीडर” कार्यालय से संबद्ध अस्थायी वकीलों में आर. चक्रवर्ती, बी. सरवनन, एम.पी. सेंथिल, आर. पार्थिबन, आई. पिनायगाश, एस. शिवसुब्रमण्यम, एस. शिव थिलाकर और के. पोरकोडी के नाम शामिल हैं। ये वकील मदुरै बेंच में लंबित मामलों में सरकार का पक्ष रखेंगे।
सरकारी आदेश में कहा गया है कि इन नियुक्तियों का उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना और नियमित नियुक्तियों तक कानूनी प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखना है। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमित विधि अधिकारियों के चयन की प्रक्रिया नियमों के अनुसार जारी है और चयन पूरा होने के बाद स्थायी नियुक्तियां की जाएंगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन अस्थायी नियुक्तियों से राज्य सरकार को अदालतों में अपने मामलों की सुनवाई में सहूलियत मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी। फिलहाल सभी नियुक्त वकील तत्काल प्रभाव से अपने-अपने दायित्व संभालेंगे।
--आईएएनएस
एसएके/डीकेपी
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